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मंजु राय ( क्वीन ) 

 

 

 

 

रजनीगंधा खिल उठे फिर मन-मंदिर में , हो गया सुवासित सांसों का रेला

स्पर्श तेरी मतवाली चाहतों का , अरमान मचल उठे भीगी हुयी सी रात में

चाँदनी अठखेलियाँ करे बदन से मेरे, कायनात गा उठी लिए जज्बातों का रेला

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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