tarasingh
Administrator Dr. Srimati Tara Singh


www.swargvibha.in






 

 

मीना पाण्डेय

 

 


मिलन का मीत होती है
विरह का गीत होती है
इश्क़ 'औ' रंज को कहना
ग़ज़ल की रीत होती है।

२.
दर्द भी अपना तुम्हें देती हूँ
इस तरह में छंद बोती हूँ
हुनर पे मेरे उंगली उठाने वालो
हर्फ़ जीती तब ग़ज़ल होती हूँ।

 

 

 

HTML Comment Box is loading comments...