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पीयूष कुमार द्विवेदी 'पूतू'

 

 

गगन ने तोड़कर मुझको सितारा दे दिया होता।
समंदर ने मुझे भी इक किनारा दे दिया होता।
हमेशा रास आती बज़्म दर्दोँ की सुनो 'पूतू'
बढ़ाकर हाथ उसने गर सहारा दे दिया होता।

 

 

पीयूष कुमार द्विवेदी 'पूतू'

 

 

 

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