www.swargvibha.in






श्यामा सिंह

कुछ नाते
कुछ नाते-
बेनाम ही भले लगते हैं.
अपेक्षा नहीं रखते
किसी संबोधन की-
मन के अंदर
दिए की लौ से
जले रहते हैं.

HTML Comment Box is loading comments...