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कौमी एकता: राष्ट्रीय एकता एंव विकास--डां.नन्दलाल भारती

 

।। कौमी एकता: राष्ट्रीय एकता एंव विकास का पर्याय ।।

 

 

कौमी एकता अर्थात अनेकता में एकता यही हमारे देश की पहचान है। भारतीय जीवन विविधतापूर्ण है। हमारा देश कौमी एकता का जीवन्त उदाहरण है। अनेक भाशायें बोलने वाले अनेक धर्मावलम्बी और 125 अरब की जनसंख्या इस देश में बसती है। यह देश दुनिया का सबसे बड़ा लोकतन्त्रिक देश है।ऐसे विविधतापूर्ण देश के लिये कौमी एकता का महत्व और अधिक बढ जाता है। । कौमी एकता को जीवन्तता प्रदान करने के लिये देश में कौमी एकता दिवस मनाये जाने की परम्परा प्रथम महिला प्रधानमन्त्री श्रीमती इंदिरा गांधी की जयन्ती 19 नवम्बर से प्रारम्भ हुई । भारत के जितने भी प्रघानमन्त्री हुए है,वे सभी प्रतिभा के धनी रहे है,लेकिन इंदिरा गांधी के रूप में जो देश को प्रधानमन्त्री प्राप्त हुई,वैसा प्रधानमन्त्री नही मिला क्योंकि बतौर प्रधानमन्त्री उन्होने अनेक चुनौतियों का मुकाबला किया युद्ध हो, विपक्ष की खींचातानी हो,कूटनीति का अन्र्तराश्ट्रीय मामला रहा हो अथवा देश की कोई दूसरी समस्या रही हो इंदिरा गांधी ने अक्सर स्वयं को सफल साबित किया।

 

 

इंदिरा गांधी जवाहर लाल नेहरू द्वारा षुरू की गयी औद्यौगिक विकास एवं समाजवादी नीतियों पर कायम रही और उन्हें प्रोत्साहित किया। उन्होने सोवियत संघ के साथ नजदीकी का सम्बन्ध बनाये रखा। पाकिस्तान और भारत विवाद के दौरान वे समर्थन के लिये सोवियत संघ पर ही निर्भर रही। जिन्होने इंदिरा गांधी के प्रधानमन्त्रित्व काल को देखा है वे लोग कहते नही थकते कि इंदिरा गंाधी में अपार साहस और धैर्य था।

 

 

श्रीमती इंदिरा गांधी ने अपनी मृत्यु के कुछ दिन पहले कहा था कि, मुझे लगता है कि राश्ट्र सेवा में मेरी मृत्यु हुई तो मेरे खून की हर बूंद... देश के विकास में काम आयेगी । श्रीमती इंदिरा गांधी का यह ब्रहमवाक्य देश के विकास में मील का पत्थर साबित हुआ है और देश को एकता के सूत्र में बांधने में सफल भी। भारतीय परिपेक्ष्य में कौमी एकता राश्ट्रीय विकास की पहली सीढी है। कौमी एकता देश के आत्मा की पुकार बन चुकी है,सम्भवतः इसी कारण से देश को विष्व गुरू कहा जाता है।

 

 

कौमी एकता का मतलब ये नही कि किसी विशय पर मतभेद नही हो,मतभेद हो सकता है पर मनभेद नही होना चाहिये। मतभेद होने के बावजूद जो देश के लिये हितप्रद हो सुखद,षान्तिमय और जनहित में लाभकारी हो उसे धर्म-सम्प्रदाय से उपर उठकर मान लिया जाये ऐसी भावना राश्ट्रीय एकता को कुसुमित करती है। देश के सभी नागरिकों के दिल में राश्ट्र के प्रति वफादारी हो वे पहले भारतीय हो बाद में हिन्दू मुसलमान या अन्य धर्मवलम्बी। कौमी एकता भारतीय समाज के लिये दीपक है,सुख और षान्ति का द्योतक भी। सर्वधर्म समभाव एवं सघे षक्ति मानवीय एवं राश्ट्रीय विकास का आधार है। भारतीय परिपेक्ष्य में कौमी एकता अमोघ षक्ति है। राश्ट्रीय एकता,समाजिक एवं आर्थिक विकास की परिचायक भी है कौमी एकता।

 

 

जैसाकि सर्वविदित है हमारा देश विभिन्न संस्कृतियों का देश है,जिसकी वजह से दुनिया में देश की विषिश्ट पहचान बनी है। अलग-अलग संस्कृति और भाशा होते हुए भी हम सभी राश्ट्रीय एकता के सूत्र में बंधे हुए है और वक्त आने पर एकता और अखण्डता का परिचय देने में पीछे भी नही रहते जो कौमी एकता की वजह से ही सम्भव हो पाता है।

 

 

स्वामी विकवेकानन्द ने तो यहा तक कहा है कि मेरे सपनों के हिन्दुस्तान की यदि आत्मा वेदान्त होगी तो षरीर इस्लाम होगा । षरीर के बिना आत्मा के अस्तित्व का विचार कोई भी नही करेगा। स्वामी विवेकानन्द का यह ऐतिहासिक कथन कौमी एकता की दृश्टि से सर्वमान्य होना चाहिये। भारतीय समुदाय में कौमी एकता की आवष्यकता हर ओर महसूस की जा रही है परन्तु कौमी एकता को राजनीतिक एकता का विशय बना दिया गया है।

 

 

कौमी एकता का मतलब ऐसी एकता जो राश्ट्रहित एंव जनहित में कभी भी विखण्डित न हो सके। कौमी एकता के लिये आवष्यक है कि किसी भी धर्म के मानने वाले हो हिन्दू मुसमलामान,इसाई अथवा अन्य धर्मालवम्बी वे स्वयं को धर्म से उपर उठकर इंसानियत और राश्ट्रीयता का परिचय दे,जिससे देश में अपनेपन, आत्मीयता और सदभाव में अभिवृद्धि हो सके। कौमी एकता की दृश्टि से हिन्दी का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। प्राचीन काल से आज तक हिन्दी ने हिन्दी,मुसलामन सिक्ख इसाई आदि के बीच समन्वय एवं सौहार्द का सद्भाव उत्पन्न किया है।

 

 

कहते है संगठन ही षक्ति है भारतीय परिपेक्ष्य में कौमी एकता इसका परिचायक है। हिन्दू धर्म के अलावा बौद्ध,जैन और सिक्ख धर्म का उद्भव यही हुआ है इसके अतिरिक्त भारत में मुसलामन,इसाई,पारसी एवं अन्य सभी धर्मो एवं सम्प्रदायों के लोग रहते है और सभी को बराबर का दर्जा प्राप्त है। अनेकता के बावजूद देश में कौमी एकता है। यही कारण है कि सदियों से हमारा देश अनेकता में एकता का परिचय दुनिया को देता आ रहा है। हमारा देश उदारवादी होते हुए सत्य और अहिंसा का सम्मान करता है। इंदिरा गांधी ने कौमी एकता के महत्व को अच्छी तरह समझ लिया था,षायद इसीलिये वे दृढ. निष्चयी थी। उनके दृढ निष्चय और निर्णय लेने की अद्भूत क्षमता के कारण उन्हें विष्व राजनीति में लौह महिला के रूप में जाना जाता था।

 

 

1971 में पाकिस्तान के युद्ध के बाद इंदिरा गांधी ने अपना ध्यान राश्ट्र्र के विकास की तरफ केन्द्रित किया 1972 में बीमा कारोबार एवं कोयला उद्योग का राश्ट्र्रीयकरण कर दिया था। हदबन्दी कानून को पूरी तरह लागू किया,आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो को सस्ती दरों पर खाद्यान्न प्रदान करने की योजना का षुभारम्भ,ग्रामीण बैंको की स्थापना,कुटीर उद्योगों की स्थापना आदि अनेक आवष्यक कदम इंदिरा गंाधी द्वारा उठाये गये। इन कार्यो से इंदिरा गांधी को अपार जनसमर्थन प्राप्त हुआ,इसके अतिरिक्त उन्होने अनेक समाजोपयोगी कदम भी उठाये जिससे सामाजिक एवं आर्थिक विकास के साथ कौमी एकता को भी बल मिला। इंदिरा गांधी का जीवन उपलब्धियों से भरा है। दृढ इरादों और सटीक फैसले लेने वाली इंदिरा गांधी ने अपनी का्रन्तिकारी सोच और अदभूत प्रषासनिक क्षमता से विष्व में भारत को गौरवषाली राश्ट्र्र बनाने में महत्व भूमिका निभाई । इंदिरा गांधी कीे दूरदृश्टि,पक्का इरादा,कड़ी मेहनत और अनुषासन जैसी दूरगामी सोच का ही परिणाम है कि भारतीय परिपेक्ष्य में धार्मिक निरपेक्षता,पंथ निरपेक्षता सर्वधर्मसमभाव,मानवीय समानता और सदभावना सुदृढ. हुई हैे और कौमी एकता भी कुसुमित हुई है। विष्वास के साथ कहा जा सकता है 19 नवम्बर इंदिरा गंाधी की जयन्ती के उपलक्ष में कौमी एकता दिवस की स्थापना राश्ट्रहित एवं जनहित में लाभकारी होगा और विष्वपटल पर कौमी एकता का कीर्तिमान स्थापित होगा।कौमी एकता दिवस के अवसर पर कहना चाहूंगा,

 


आओ करे सलाम,जो आये
कौमी एकता/राश्ट्रीय एकता के काम
जग में उंचा जिनका नाम
जन-जन को एकता पैगाम
आओ करे सलाम
जो आये कौमी एकता के काम..............
धर्मनिरपेक्षता समता और सद्भावना
राश्ट्रहित में कौमी एकता का पैगाम
जीवन होगा सफल काल के गाल
अमिट होगा नाम
आओ करे सलाम
जो आये कौमी एकता के काम..............
क्यों धर्मवाद,क्यों जातिवाद
आतंकवाद क्यों
क्यों उंच-नीच का भेद
कौम एकता राश्ट्रीय विकास
जीओ और जीने दो
सभी धर्माे का एक ही पैगाम
आओ करे सलाम
जो आये कौमी एकता के काम..............
कौमी एकता दिवस
समानता सर्वधर्म समभाव की प्रतिज्ञा
दोहराने का दिन
मानव उद्धार राश्ट्रहित-जनहित में
षान्तिदूत,निष्छल पैगाम
धर्मरिपेक्षता के धरातल पर
अमिट रहेगा प्र्रियदर्षनी
इंदिरा गांधी का नाम
आओ करे सलाम
जो आये कौमी एकता के काम..............

 


डां.नन्दलाल भारती

 

 

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