TOP BANNER

TOPBANNER







flower



july2015
कविताएँ 

आलेख

गज़ल

गीत

मुक्तक

हाइकु

कहानी





संस्थापिका एवं प्रधान सम्पादिका--- डॉ० श्रीमती तारा सिंह
सम्पादकीय कार्यालय--- --- 1502 सी क्वीन हेरिटेज़,प्लॉट—6, सेक्टर—
18, सानपाड़ा, नवी मुम्बई---400705
Email :-- swargvibha@gmail.com
(m) :--- +919322991198

flower5

rosebloom





 

तेरा आँचल पकड़कर कब तक सरकता रहूँ-डॉ० श्रीमती तारा सिंह

 

तेरा आँचल पकड़कर कब तक सरकता रहूँ मैं
लहरों बीच खिला कमल देख तड़पता रहूँ मैं

 

 

एक तो नश-ए-मय, उस पर नशीली आँखें तेरी
इस जुल्मते-जहाँ1 में कब तक सिसकता रहूँ मैं

 

 

उम्र गुजर गई तेरे कूचे-ए-गेसू2की जुस्तजू3 में,और
कब तक तेरे दिल में दिल बनकर, धड़कता रहूँ मैं

 

 

सहरा4 में कोई दीवार भी तो नहीं होता,जिसे
पकड़कर अपनी रेजी-मुहब्बत5का समर देखता रहूँ मैं

 

 

तेरी बेरुखी ने पलट दी मेरे इश्क की काया
अपने बे-सरा-पा6 अश्क को कब तक बाँधता रहूँ मैं

 



1. अंधेरी दुनिया 2. जुल्फ़़ की गली 3. तलाश
4. मरुभूमि 5.असफ़ल प्रेम 6.बिना सर-पैर का

 

 

HTML Comment Box is loading comments...