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असम की बाढ़ मे 50 हजार लोग विस्थापित



असम के बीच से हो कर बहने वाली देश की बृहत्तम नदी ब्रम्हपुत्र और इसकी सहायक नदियों की प्रयलंकारी बाढ़ मे कम से कम सौ लोगों के मारे जाने और 50 हजार लोगों के विस्थापित होने की खबर है। राज्य मे हर साल आने वाली बाढ़ को राष्ट्रीय समस्या घोषित करने के लिए राज्य मे सत्तासीन कांग्रेस सरकार सहित विपक्षी दलों और अन्यान्य जातीय संगठनों ने केन्द्र से कई बार मांग की लेकिन इस मांग की वर्षों से उपेक्षा की जा रही है। हर साल बाढ़ के कारण लाखों लोग बेघर होते है और हर बार करोड़ों का नुकसान होता है। आरोप तो यह भी है कि राज्य मे हर साल आने वाली बाढ़ से केन्द्र और राज्य सरकार के विभागीय अफसरों की चांदी
बनती है और इसीलिए राज्य मे हर साल आने वाली बाढ़ के स्थायी समाधान के प्रयास नही हीं किये जाते। हालांकि बाढ़ और भूमि कटाव के बचाव कार्य के लिए राज्य और केन्द्र सरकार एवं विभिन्न स्रोतों से पर्याप्त धन मुहैया कराया जाता है। फिर भी विभागीय लूंठन राज के चलते असम के लाखों लोगों को हर साल बाढ़ के प्रकोप का शिकार होना पड़ता है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2005-2006 से ले कर 2011 तक राज्य मे आने वाली बाढ़ पर नियंत्रण पाने और भूमि कटाव के बचाव कार्य के लिए 810 करोड़ की राशि मुहैया कराई गई थी। लेकिन विभागीय लापरवाही और लूंठन के चलते इस धन का बाढ़ पीड़ित लोगों की सहायता के लिए वांछित उपयोग नहीं किया गया। इस आशय का आरोप असम मानव अधिकार आयोग ने भी लगाया है। आयोग ने अखबारों मे प्रकाशित खबरो के आधार पर स्वयं संज्ञान (suo motto cognizance) लेते हुए राज्य जल संसाधन विभाग के भ्रष्ट व लूंठनकारी अफसरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किये जाने की पेशकश की है। माननीय न्यायाधीश डा. आफताब हुसैन सइकिया और सदस्य के रुप मे ज्योतिप्रसाद चलिहा को लेकर गठित आयोग की खंड पीठ ने असम के चीफ सेक्रेटरी को तीन सदस्यीय एक कमेटी गठित कर सारे घोटाले की जांच कराने के निर्देश जारी किये हैं।
असम मानव अधिकार आयोग खंड पीठ के अनुसार बाढ़ नियंत्रण व सहायता विभाग ने 17,463.28 लाख एन.ए.बी.ए.आर डी. (NABRD) से, 1104.52 लाख एन.ई.सी. (NEC) से और 62,491.46 लाख सी.एस.एफ (CSF) से प्राप्त कर खर्च किया है। आयोग के निर्देश के अनुसार इस खर्च की मद दर मद जांच की

जायेगी। जांच की रिपोर्ट दाखिल करने के लिए तीन महीने का समय निर्धारित किया गया है।
असम का माजुली द्वीप जो विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप माना जाता है असम की बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है।
बाढ मे डूबा आधे से ज्यादा माजुली नदी द्वीप
असम के जोरहाट जिले में स्थित माजुली नदी द्वीप का बड़ा हिस्सा ब्रह्मपुत्र नदी में आई बाढ़ में पूरी तरह डूब गया है। प्रशासन के बचाव एवं राहत कार्य में बेहद मशक्कत के बावजूद स्थिति कठिन बनी हुई है। नदी द्वीप के एक प्रमुख हिस्से के 26 जून को बाढ़ की चपेट में आ जाने के बाद पानी कई हिस्सों में घुस रहा है।
जोरहाट के उपायुक्त आर सी जैन ने आज कहा कि द्वीप का लगभग 50-60 प्रतिशत हिस्सा बाढ़ में डूब गया है। कई स्थानों पर लोगों ने घर की छतों पर शरण ली है। हालांकि बाढ़ से किसी की मौत की कोई सूचना नहीं है। उन्होने कहा किहमारी प्रमुख चुनौती बाढ़ में फंसे लोगों को भोजन और सुरक्षा मुहैया कराया है। उन्होंने कहा कि बाढ़ से प्रभावित लोगों तक भोजन पहुंचाने के लिए
एनडीआरएफ के जवानों को लगाया गया है। राज्य के कृषि मंत्री नीलमणि सेन डेका ने बताया कि नदी द्वीप में बाढ़ से करीब 82 हजार लोग प्रभावित हैं।

 

 

Nagendra Sharma

 

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