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तेज हुई दिलों की धड़कन

 

 

जब हम स्कूल में पढ़ाई करते थे। साल भर की मेहनत के बाद आगे की कक्षा में दाखिले के लिए परीक्षा देना होता था। परीक्षा के समय तो हम बड़े खुशी से रहते थे। पर जब समय आता था नतीजे का तो दिल की धड़कन तेज होने लगती थी। दिल में एक डर रहता था। पता नही क्या होगा। पास होंगे या फेल। उम्मीद लगा के बैठे रहते थे कि दर्जा में अव्वल आएगें। जिसकी बेचैनी नतीजे आने दिन से एक रात पहले से चेहरे पर झलक पड़ती थी। खाना-पीना भी अच्छा नही लगता था। ज्यादा बात करना भी गुनाह लगता था। बस ईश्वर से दुआ करते थे कि नतीजे को पक्ष में रखना। और जिस दिन नतीजा आने वाला होता था। गजब का दिन होता था बेचैनी भरा। नतीजा आते ही बस अपने आप को देखना होता था कि परीक्षा में सफल हुआ या नही। हुआ तो क्या स्थान प्राप्त किया। ये सब बताने का मेरा मतलब जम्मू कश्मीर और झारखण्ड के विधानसभा के चुनाव के नतीजों से है। दोनों राज्य के विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेने वाले उम्मीदवार के भी दिलों की धड़कने तेज हो रही है। दोनों राज्यों के चुनाव के नतीजे 23 दिसम्बर (कल आ रहे हैं)। हर उम्मीदवार यही आस लगाकर बैठा है कि आखिर होगा क्या। बेचैनी सी छा रही होगी। पांच चरण में हुए दोनों राज्यों के चुनाव में पहला स्थान किसे मिलता है। सभी सोच में पड़े होगें। खाने-पीने के साथ-साथ बेचैनी भी बढ़ रही होगी। भगवान से दुआएं हो रही होगी। जम्मू कश्मीर के विधानसभा चुनाव दो या तीन राजनीतिक पार्टियों का कड़ा मुकाबला होता था। पर इस राज्य में पहली बार ऐसा हो रहा है। जब भाजपा को विधानसभा चुनाव में प्रबल दावेदार के रूप में लिया जा रहा है। इससे पहले विधानसभा के चुनाव में वहां नेकां, पीडीपी व कांग्रेस के मध्य मुकाबला होता था। अगर बात करे हम लोकसभा के चुनाव कि तो राज्य में चुनाव के नतीजे भी चौंकाने वाले थे। भाजपा व पीडीपी ने छह संसदीय सीटों में से तीन तीन जीत ली। सत्ताधारी पार्टी नेशनल कांफ्रेंस व कांग्रेस खाली हाथ रहना पड़ गया। जम्मू कश्मीर चुनाव पर ‘एक्जिट पोल’ के लगभग सारे नतीजे मुफ्ती मोहम्मद सईद की पार्टी पीडीपी के पक्ष में जाने के आसार में लग रहे हैं, साथ ही भाजपा के दूसरे नम्बर पर देखा जा रहा है। बीजेपी को 2002 में सिर्फ एक सीट मिली थी। 2008 के चुनाव में अमरनाथ भूमि अधिग्रहण विवाद के चलते बीजेपी ने बाजी मारी। एक सीट पाने वाली भाजपा 11 सीटों पर अपना कब्जा जमा लिया था। दूसरी तरफ झारखण्ड के विधानसभा चुनाव में एक्जिट पोल के नतीजे आने के बाद सवाल उठता है कि क्या यहां बीजेपी पूर्ण बहुमत से अपनी सरकार बनाएगी। झारखण्ड में भी कांग्रेस की हालात पश्त हैं। लेकिन ये एक्जिट पोल कितने पुख्ता साबित होगें ये देखने वाली बात होगी। मोदी की लहर झारखण्ड और जम्मू में रंग ला रही है ? देखने वाली बात ये भी होगी कि आखिर अगर बीजेपी को पूर्ण बहुमत नही मिला तो झारखण्ड का मुखिया कौन बनेगा। उधर जम्मू कश्मीर में पीडीपी या किसी और को पूर्ण बहुमत मिलता एक्जिट पोल में नही दिखाया गया है। समस्या वहां भी महाराष्ट्र जैसी न उत्पन्न हो जाए। कांग्रेस के हालात जम्मू कश्मीर में में भी ख़राब निकल गए। उनके उम्मीदवार दुआ कर रहे होगें हे भगवान इस बार मौका दे दो। ज़नता को अच्छा काम कर के दिखाऊंगा। नतीजा किसी के पक्ष में आए। हर उम्मीदवार बेचैन हो घूम रहा होगा। कुछ को तो पता होगा कि मै नही जीत रहा पर दिल में नतीजे के आने का बेसबरी से इंतजार होगा। हो भी क्यों न पांच और 6 सालों की पढाई थी इन नेताओं की। हर विषय को ज़नता ने ठीक से ही जांचा होगा। तब जाकर अपना मत प्रदान किया होगा। इन नेताओं की इतने सालों की पढ़ाई(यानि) किए गए विकास कार्य से अब उनकी और पार्टी के भाग्य का फैसला होगा। इंतजार है तो बस अब सबको कल सुबह (23 दिसम्बर) का। अपने परिणामों को जानने का।

 

 


रवि श्रीवास्तव

 

 

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