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अखिल भारतीय भाषा साहित्य सम्मलेन की साहित्यिक गोष्ठी

 

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अखिल भारतीय भाषा साहित्य सम्मलेन की साहित्यिक गोष्ठी
विगत सांध्यवेला में डाक्टर हुकुम् पाल सिंह विकल की अध्यक्षता श्री सतीश चतुर्वेदी के विशिष्ट आतिथ्य में चित्रांश महाविद्यालय के सभागार में आयोजित गोष्ठी में डाक्टर आनंद ने पधारे कवियों के स्वागत में पंक्तियाँ पढी :
भाव सुमन को गूंथ गूँथ कर ,सुरभित हार बनाए /आशायों के दीप जलाकर स्वागत थाल सजाये
स्वीकार करो स्वागत उपहार /स्वागत सौ सौ बार !
डाक्टर राम वल्लव आचार्य ने अपने समसामयिक गीतों से गोष्ठी का शुभारम्भ किया .जाने माने गज़लकार डाक्टर किशन तिवारी ने अपनी ग़ज़लों की प्रस्तुती से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया .
डाक्टर मोहन तिवारी आनंद का करतल ध्वनि से स्वागत हुआ उनके गीतों में व्यग्य स्वर छाया रहा उन्होंने पूंछा :
कैसा ज़माना आया लोग झुलसते पानी में / जीवन का असितित्व क्या कहें ,बूढ़े दीखते जवानी में
वरिष्ठ साहित्यकार उमेश नेमा ने अपनी बुलंद आवाज़ में कवितायों से समाँ बाढ़ दिया .डाक्टर आनंद ने गीत गाया :
आओ घर घर दीप जलाएं /जहां अधेरा बहाँ जलाए ...
उनके दिवाली के दीप दोहों ने गोष्ठी को ऊचाइयां दीं ..श्री चतुवेदी ने विद्वतापूर्ण संक्षिप्त बार्तालाप के बाद् मनमोहक रचनायों से गोष्ठी को सफल बनाया
अध्यक्षीय वक्तव्य के बाद अपने गीतों से विकल जी ने सभागार को करतल ध्वनी से गुजा दिया .
अंत में महेश सक्सेना ने सभी क्सह्भागियों तथा महाविधियालय के अधिष्ठाता माननीय श्री अश्वनी श्रीवास्तव और स्टाफ को धन्यवाद ज्ञापित किया .स्वल्पाहार के बाद गोष्ठी समाप्त हो गयी .
अशोक दुवे अशोक
सचिव अ .भा भा . सा स जिला शाखा भोपाल म .प्र

 

 

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