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अंधविश्वास को रोकने के लिए ओझा और तांत्रिक पर रोक लगे

 

andh wishwas

 

अंधविश्वास को रोकने के लिए ओझा और तांत्रिक पर रोक लगे - प्रखण्ड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी, जगनाथ सिंह
भूत प्रेत को बढ़ावा देने वाले सिरियल पर रोक लगाए- विनय कुमार
डायन कुप्रथा से मुक्ति दिलाने के लिए सबकी सहभागिता आवयश्क हैं- रब्बानी
डालटनगंज 02.07.2014 डायन प्रथा नियंत्रण पर बी0आर0सी0 भवन में गुरू गोष्ठी के साथ समन्वय स्थापित कर प्रधानाध्यापक/प्रधानाध्यापिका एवं षिक्षकों के बीच कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता प्रखण्ड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी, जगनाथ सिंह ने की। कार्यक्रम का आयोजन महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, महिला सषक्तिकरण मिशन, भारत सरकार के सौजन्य से ग्रामीण समाज कल्याण विकास मंच के तत्वधान में किया गया। कार्यक्रम का संचालन सचिव मो0 हषमत रब्बानी ने किया।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए मंच के सचिव मो0 हशमत रब्बानी ने कहा कि इस कुप्रथा को दुर करने में मध्यम वर्ग अहम भूमिका निभा सकता है। उच्च वर्ग को समय नहीं है और निम्न वर्ग के पास क्षमता नहीं है। यही कारण है कि डायन अत्याचार के खबर प्रति दिन के अखबार में सुर्खियों में छाए रहते है। 21वीं सदी में भी समाज डायन जैसे कुप्रथा से अभिषप्त है, जिससे मुक्ति दिलाने के लिए सबकी सहभागिता आवयष्क हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रखण्ड षिक्षा प्रसार पदाधिकारी, जगनाथ सिंह ने कहा कि षिक्षको को समाज में फैले इस अंधविष्वास को दुर करने में आगे आना चाहिए। षिक्षको का षिक्षा के अलावा कुछ सामाजिक दायित्व भी हंै। समाज को बदलने में एवं समाज को षिक्षित करने में षिक्षक अग्रणी भुमिका निभा सकते है। उन्होनें ने कहा कि अंधविष्वास को रोकने के लिए ओझा और तांत्रिक पर रोक लगाए।
कार्यक्रम में शामिल एक षिक्षक विनय कुमार ने कहा कि डायन अत्याचार को रोकने के लिए ओझा गुणी, झाड़ फूक पर रोक लगाने की सबसे पहले जरूरत है। साथ ही टी0वी0 पर दिखाय जाने वाले अंधविष्वास पर सिरियल को रोक लगाना चाहिए एवं उससे पहले डायन अत्याचार अधिनियम का प्रचार होना चाहिए। जगह-जगह पर नुक्कड़ नाटक दिखाया जाना चाहिए। वहां उपस्थित एक निमिया की षिक्षिका ने कहा कि इसके खिलाफ गांव-गावं में प्रचार होना चाहिए।
बैठक को संबोधित करते हुए कार्यक्रम प्रभारी स्वर्णलता रंजन ने कहा कि डायन प्रथा जैसे कुरीति के खिलाफ समाज के लोगों को एक मिषन के रूप में काम करना होगा। इस अभियान में समाजिक अभिषाप को खत्म करने के लिए जागरूक करना सबसे बड़ी जरूरत है। लोगो को यह समस्या लगे और लोग प्रड़ताड़ित महिला की वेदना को गहराई से समझे, जो बेकसुर हो कर भी अंधविष्वास की षिकार बनती है। वह महिला भी किसी की जननी है, मां एवं बहन है, उन्होनंे डायन अत्याचार अधिनियम की जानकारी भी देते हुए कहा कि कानून के साथ बच्चो के अभिभावक के बीच भी षिक्षक की समस्या को रखे।
अधिवक्ता मो0 नसिमुद्दीन खां ने डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम 2001 की जानकारी देते हुए कहा कि डायन कहना कानूनन जुर्म है। डायन कहने पर तीन महिने की सजा एवं एक हजार रूप्या जुर्माना या दोनो सजा दी जा सकती है।
कार्यक्रम में लगभग 50 विभिन्न स्कूलों से आय प्रधानाध्यापक/प्रधानाध्यापिका एवं षिक्षक मौजूद थे जिन्होंने इस कार्यक्रम को गांव तक पहुंचाने के लिए सहमति जताई। बी0आर0ओ0 सदर सतेन्द्र कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
कार्यक्रम में शशंक कुमार, शम्भू साव, विकास कुमार, विजय कुमार आदि ने सहयोग किया।

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