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लेखक एवं चित्रकार अवनीन्द्रनाथ टैगोर की पुण्य तिथि...

 

 

awindranath

 

"लेखक व चित्रकार अवनीन्द्रनाथ टैगोर की देन" पर हुई संगोष्ठी देवघर (_________________________): स्थानीय विवेकानन्द शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान तथा योगमाया मानवोत्थान ट्रस्ट के युग्म बैनर तले वतन के यशस्वी लेखक व कलाकार अवनीन्द्रनाथ टैगोर की 64 वीं पुण्यतिथि मनाई गयी । मौके पर संस्थान के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव ने कहा- आज ही के दिन सन् 1951 में अवनी बाबु की मृत्यु हुई थी । 7 अगस्त,1871 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में उनका जन्म गुणेंद्रनाथ टैगोर के पुत्र के रूप में हुआ था । सन् 1889 को उन्होंने संस्कृत कॉलेज से स्कूल की पढ़ाई पूरा की एवम् उसी वर्ष उनका विवाह सुहासिनी देवी से हुआ । सन् 1890 को उनका दाखिला सेंट ज़ेवियर कॉलेज में हुआ । 25 वर्ष की आयु में उन्होंने एक इटालियन कलाकार से चित्रकारिता सीखना प्रारम्भ कर दिया । एक अंग्रेज चित्रकार चार्ल्स पामर के स्टूडियो में उन्होंने कॉस्ट ड्राइंग, फोलियाज ड्राइंग, पेस्टल, लाइफ स्टाइल इत्यादि सीखा। हावेल् से उन्होंने मुग़ल और राजपुताना पेंटिंग स्टाइल सीखा । सन् 1907 में उन्होंने "द बेंगल स्कूल" एवम् "इंडियन स्कूल ऑफ ओरिएण्टल आर्ट" की स्थापना की । सन् 1913 में लंदन और पेरिस में तथा 1919 में जापान में उनके द्वारा बनाई गई चित्रों की प्रदर्शनी लगी । वें "भारत के आधुनिक चित्रकला के जनक" के नाम से जाने जाते हैं । उनके पुस्तकों में खीरेर पुतुल, बूड़ो आंग्ला, राजकाहिनी, शकुंतला, आदि काफी चर्चित है । उनकी चित्रों की चर्चा आज भी चित्र जगत में होती है । उनके चित्रों में अभिसारिका, बुद्ध और सुजाता, मन्दिर नृत्यांगना, यमुना नदी किनारे राधा, बाबा गणेश, अंतिम यात्रा, वीणावादिनी, अशोक की रानी इत्यादि प्रदिद्ध है । वे भले ही आज नही हैं परन्तु विश्व के चित्रकारों के दिल में सदा राज करेंगे । अन्य वक्ताओं ने भी उनके कृतित्व पर प्रकाश डाला । सदस्य आदर्श कुमार द्वारा धन्यबाद ज्ञापन के बाद कार्यक्रम का समापन हुआ ।

 

 

PRADIP KUMAR SINGH Deo

 

 

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