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कैंसर से पीड़ित महिला के विचार

 

cancerperit

 

‘‘व्याधि की इस मंजिल को इस तरह पार कर जाये।
मुख पर शिकन न हो, जब तक लिये हंसकर जीये जायें।
कभी किसी से शिकायत ना हो अपने कर्मो का भोग है
नश्वर तन एकदिन तो जायेगा ही आत्मा से प्रीत लगायें’’
ब्रेस्ट कैंसर का पता लगने के बाद सभी परिवार के सदस्य दूर-दूर से पता लेने के लिये आ रहे थे,
उनकी आँखे नम हो जाती थी। लेकिन मुझको लगता था कि मेरे कारण ये दुःखी हो रहे हैं। कई बार उनको सान्त बना देती, डा0 ने पहले ही कह दिया था इस आॅपरेशन के पश्चात यदि कैंसर ज्यादा फैला हुआ नहीं है। आॅपरेशन के पश्चात शरीर की शोभा तो अवश्य बिगड़ी लेकिन भौतिक साधनों से उसे भी सजा संवारकर वैसा ही दिखाने में सक्षम हँू। बाल तो एकबार छः महीने के लिये उड़ते हैं।
फिर तो पहले से भी अच्छे आ जाते है।
मचलता है क्यो अपनी नश्वर देह की साजोसंवर पे।
एक दिन मिट्टी में मिल जायेगी।
फिर रह जायेंगी यादें

 

 


Nishi Bansal

 

 

 

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