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मध्य प्रदेश के कैथोलिक बिशप्स शांति और सद्भाव के लिए प्रतिबद्ध

 

 

bishop

 

 

काथलिक काउंसिल ऑफ़ मध्य प्रदेश (सी.सी.एम.पी) द्वारा दो दिन की बैठक आयोजित

 

 

भोपाल, 13 अगस्त 2015 : काथलिक काउंसिल ऑफ़ मध्य प्रदेश (सी.सी.एम.पी) द्वारा पास्ट्रल सेंटर, भोपाल में दो दिन की बैठक आयोजित की गई। इसमें म.प्र. के सभी काथलिक धर्माध्यक्षों के साथ-साथ म.प्र. के विभिन्न क्षेत्रों के विषिष्ट प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य विषय था-’समाज में बढ़ती हिंसा और अषांति के वातावरण में षांति के दूत बनने की चुनौती।’

 



इस विषय पर आत्ममंथन करते हुए सभी ने ईसा मसीह के जीवन और उनकी षिक्षाओं से प्रेरित होकर अपने जीवन को और अधिक प्रभावी रूप से जीने पर जोर दिया जिसमें वे स्वयं के जीवन को और अधिक प्रभावी बना सके और उनसे प्रेरित सेवा-कार्यों द्वारा समाज षांतिमय और बेहतर बना सके। षिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य सामाजिक कार्यों में अपनी निष्ठा और समर्पण की भावना को और अधिक मजबूत बनाने का निर्णय भी लिया गया है।

 



ईसा मसीह ने अपने जीवन मेें सदा निर्बलों एवं गरीबों को ऊपर उठाने और उन्हें सम्माननीय जीवन प्रदान करने का कार्य किया है। इंसान को इंसान से जोड़ने का काम किया है और ऐसा ही करने का पाठ पढ़ाया है। उनकी सबसे बड़ी आज्ञा थी- ’’एक दूसरे को अपने समान प्यार करो।’’

 


आज समाज में सांप्रदायिक षक्तियां और असमाजिक तत्व, धर्म, जाति, रंग, भाषा आदि के आधार पर अपने निहित स्वार्थ के लिये देष और समाज को विभाजित करने का प्रयास कर रहे हैं, जिसका हम सभी को मिलके सामना करना है। इस विभाजन को बचाना है और देष के संविधान के मूल्यों पर मंडराते खतरे को दूर करना है। ऐसे वातावरण में ईसा मसीह की षिक्षा हमें ’’ षांति-दूत ’’ बनने की चुनौती देती है।

 



इसी संदर्भ में पोप फ्रांसिस ने हाल ही में प्रकाषित ’लाउडातो सी’ नामक अपनी पुस्तक में कहा है कि हम सभी एक ईष्वर की संतान है। ईष्वर हम सबका पिता है अतः हम सभी बंधु हैं। वसुधैव कुटुंब हमारा परिवार है। हम सभी को भाईचारे और षांति से रहना है। पोप फ्रांसिस ने पर्यावरण पर विषेष जोर देते हुये उसके प्रति हमारी जिम्मेदारियों से अवगत कराया है। ईष्वर ने सृष्टि को हमारे हित के लिए बनाया। वही हमारा पालन-पोषण करती है। हमें उसकी रक्षा करना है उसका विनाष नहीं। इंसान अपने स्वार्थ के लिए सृष्टि का षोषण करता आया है, जिसके भयंकर परिणाम सामने आये हैं। अतः हम सभी को चेतने की जरूरत है।

 



महात्मा गांधी ने कहा है- ’’धरती के पास सभी की जरूरत के लिये पर्याप्त है, किन्तु सभी के स्वार्थ के लिये नहीं।’’


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