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डायन प्रथा के नाम पर महिलाओं पर अत्याचार होना मानव समाज के लिए शर्म की बात - एस0डी0ओ0 रंजीत लाल

 

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डायन प्रथा नियंत्रण कार्यक्रम में सब की सहभागिता जरूरी- लता
हुसैनाबाद 20.06.2014 डायन प्रथा नियंत्रण पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन मुख्य अतिथि एस0डी0ओ0 श्री रंजीत लाल एवं विषिष्ट अतिथि प्रखण्ड विकाय पदाधिकारी षंकरा चार्य जमाड की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ जिसका संचालन कार्यक्रम प्रभारी स्वर्णलता रंजन ने की इस अवसर पर काफी संख्या में पंचायत प्रतिनिधि, पंचायत सेवक, मुखिया, उप प्रमुख, सहिया, सहियासाथी, जल सहिया, आगंनबाड़ी सेविका आदि लगभग पांच सौ की संख्या में लोग उपस्थित थे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए एस0डी0ओ0 श्री रंजीत लाल ने कहा कि इस सदी में अंधविष्वास आधारित महिलाओं पर डायन प्रथा के नाम पर अत्याचार हो रहा है तो यह मानव समाज के लिए शर्म की बात है उन्होने प्रखण्ड कर्मीयों का आवाहन किया की विकास की जिम्मेदारी आप पर है साथ ही इस समाजिक गतिविधि में भी आप सहयोग करें, महिलाओं में जागरूक्ता लाए। महिलाओं को आगे बढ़ाकर आज भी पुरूष ही शासन करते है। महिलाओं में अंधविष्वास ज्यादा है।
उन्होनंे कहा कि अगर कोई डायन है तो सिद्ध करे मै उसे 10 हजार रूप्या पुरस्कार के रूप में दुगा। ये सिर्फ मन का अंधविष्वास है इसे मन से निकालना होगा और अपने अच्छे कर्म पर विष्वास करना होगा।
विषिष्ट अतिथि उपस्थित प्रखण्ड विकाय पदाधिकारी श्री शंकरा चार्य जमाड ने कहा कि डायन प्रथा के नियंत्रण हेतू इस कार्यक्रम के तहत गांव गांव में जागरूक्ता लाने की जरूरत है।
वहां पे उपस्थित मुखिया ने कहा कि अगर पुरूष को ओझा के नाम पर मारपीट किया जाए तो इसके लिए सजा क्या होनी चाहिए। इस पर अधिवक्ता मो0 नसिमुद्दीन खां ने बताया कि कानून के समक्ष स्त्री और पुरूष दोनो बराबर है इसलिए सजा भी बराबर है।
वहां पे उपस्थित डाॅ0 महेन्द्र कुमार प्रसाद ने काह कि आज भी महिलाओं पर पुरूष हावी है, महिलाए अषिक्षित है उनमें आत्मविश्वास की कमी है अत्याचार होने पर भी चुप्पि साधे रहती है, जबतक वे जागरूक नहीं होगी अत्याचार के खिलाफ आवाज नहीं उठाएगीं तब तक इस तरह की कुप्रथाएं समाज में व्याप्त रहेंगी।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए स्वर्णलता रंजन ने कहा कि अधिकतर बेसहारा, गरीब, विधवा, निसंतान, दलित महिलाओं को ही हमेषा डायन कहा जाता है। इस अंधविष्वास को दूर करने के लिए सब की सहभागिता आवश्यक है। उनकी सहायता के लिए संस्था ने मुफ्त कानूनी सहायता एवं वकील की व्यवस्था की है, साथ ही टाॅल फ्री नं0 18003456525 एवं मिस्ड काॅल नं0 7870632026 जारी किया है।
अधिवक्ता मो0 नसिमुद्दीन खां ने डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम 2001 की जानकारी देते हुए कहा कि डायन कहना कानूनन जुर्म है। डायन कहने पर तीन महिने की सजा एवं एक हजार रूप्या जुर्माना या दोनो सजा दी जा सकती है।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से बाल विकास परियोजना पदाधिकरी रूपम कुमारी, बी0पी0ओ0 धमेन्द्र उरांव, प्रखण्ड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी रामनाथ प्रसाद श्रमिक, जे0ई0 विजय कुमार, अनिल कुमार सिंह, सरस्वति देवी, नसरीम खातुन आदि उपस्थित थे।
कार्यक्रम में शंषाक कुमार, शम्भू साव, विकास कुमार आदि ने सहयोग किया।

 

 

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