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आज घोड़ों के टापों की आवाज जमीन पर कान लगाकर नहीं सुनी जा सकती

 

 

डॉ. प्रदीप

 

 

देवघर (___________________________) : पर्यावरण प्रदूषण के कारण ही पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है । इस ताप का प्रभाव ध्वनि की गति पर भी पड़ता है । तापमान में एक डिग्री सेल्सियस ताप बढ़ने पर ध्वनि की गति लगभग 60 सेंटीमीटर प्रति सेकण्ड बढ़ जाती है । आज हर ध्वनि की गति तीव्र है और श्रवण शक्ति का ह्रास हो रहा है । यही कारण है कि आज बहुत दूर से घोड़ों के टापों की आवाज जमीन पर कान लगाकर नहीं सुनी जा सकती है । जबकि प्राचीन काल में राजाओं की सेना इस तकनीक का प्रयोग करती थी । उपरोक्त बातें विपनेट, विज्ञान प्रसार, नोएडा द्वारा पंजीकृत स्थानीय। साइंस एण्ड मैथमेटिक्स डेवलपमेंट आर्गेनाईजेशन के बैनर तले विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित "प्रदूषण का स्वरुप व परिणाम" संगोष्ठी में आर्गेनाईजेशन के राष्ट्रीय सचिव डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव ने अपने भाषण के दौरान रखी । डॉ देव ने आगे कहा- पर्यावरण में प्रदूषण कई प्रकार के हैं । इनमें मुख्य रूप से ध्वनि प्रदूषण, वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण शामिल है । ध्वनि प्रदूषण कानों की श्रवण शक्ति के लिए तो हानिकारक है ही, साथ ही यह तन मन की शांति को भी प्रभावित करता है । ध्वनि प्रदूषण के कारण मानव चिड़चिड़ा और असहिष्णु हो जाता है । इसके अलावा अन्य कई विकार पैदा होने लगते हैं । हमें प्रदूषण से बचने के लिए हरित क्षेत्र विकसित करना होगा । इसके अतिरिक्त आवासियों क्षेत्रों में चल रही औद्योगिक इकाइयों को वहाँ से स्थानांतरित कर इन इकाइयों से निकलने वाले कचरे को जलाकर नष्ट करने जैसे कुछ उपाय अपनाकर प्रदूषण पर कुछ हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है । संस्थान के सदस्य प्रभाकर कापरी ने कहा - बढ़ते उद्योगों, महानगरों के विस्तार तथा सड़कों पर बढ़ते वाहनों के बोझ ने हमारे समक्ष कई तरह की समस्या खड़ी कर दी है । इनमें सबसे भयंकर समस्या है प्रदूषण । इससे हमारा पर्यावरण संतुलन तो बिगड़ ही रहा है साथ ही यह प्रकृति प्रदत्त वायु व जल को भी दूषित कर रहा है । सदस्य कृत्यानंद सिंह ने कहा- पहले प्रातः चिड़ियों की चहचहाहट से नींद खुलती थी लेकिन अब मोटर वाहनों की शोरगुल से नींद खुलती है । अकेले दिल्ली में सड़कों पर दौड़ते वाहनों एवम् कर्कश कोलाहल से करीब डेढ़ करोड़ की आवादी में से अधिकतर लोग शोर जनित बहरेपन के शिकार है । मौके पर अन्य वक्ताओं ने भी विषय वस्तु पर प्रकाश डाला । सुधाकर कापरी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ ।

 

 

 

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