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अभिलेखागार हरप्रसाद शाश्त्री की 162 वीं जयंती

 

 

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‛वृहद् धर्म पुराणं' के लेखक आज भी जीवित है साहित्य जगत में : डॉ. प्रदीप देवघर (_______________________):स्थानीय विवेकानन्द शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवम् क्रीड़ा संस्थान व योगमाया मानवोत्थान ट्रस्ट के युग्म बैनर तले ताज ऑडिटोरियम में महामहोपाध्याय हर प्रसाद शास्त्री की 162 वीं जयंती मनाई गई । मौके पर विवेकानंद संस्थान के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव ने कहा- आज ही के दिन सन् 1853 में उनका जन्म हुआ था । वे भारतीय विद्वान, संस्कृत के ज्ञाता, अभिलेखागार, बंगला भाषा के इतिहासकार थे । वे ‛चार्यपद' अविष्कार के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं । सन् 1853 में वे संस्कृत कॉलेज के प्रोफेसर के रूप में नियुक्त हुए, साथ ही बंगाल सरकार के अनुवादक भी रहें । सन् 1886 से 1894 तक शिक्षण के साथ साथ बेंगल लाइब्रेरी में लाइब्रेरियन के रूप में सेवा दिए । सन् 1895 में प्रेसीडेंसी कॉलेज में संस्कृत के विभागाध्यक्ष के रूप में नियुक्त हुए । सन् 1900 से 1908 तक उसी कॉलेज के प्राचार्य पद संभाले । सन् 1908 में गवर्नमेंट ब्यूरो ऑफ़ इनफार्मेशन में योगदान दिए । सन् 1921 से 1924 तक ढाका विश्वविद्यालय में प्रोफेसर सह बंगला एवम् संस्कृत विभाग के अध्यक्ष रहें । वें दो वर्ष ‛एशियाटिक सोसाइटी' के अध्यक्ष और 12 वर्ष बंगीय साहित्य परिषद् के भी अध्यक्ष रहें । वे रॉयल एशियाटिक सोसाइटी, लंदन के अवैतनिक सदस्य रहें । उनकी पुस्तकों में बाल्मीकि जय, बौद्धगान ओ दोहा, प्राचीन बांग्लार गौरव, वृहद् धर्म पुराणम् काफी चर्चित है उनकी मृत्यु 17 नवंबर, 1931 को हुई । वे भले ही हमारे बीच नहीँ हैं, परन्तु आज भी साहित्यप्रेमियों के दिल में विराजमान हैं । अन्य वक्ताओं ने भी उनके कृतित्व पर प्रकाश डाला ।

 

PRADIP KUMAR SINGH Deo

 

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