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जगदीश चंद्र बोस की जयंती मनाई गयी

 

 

jcbose

 

 

जगदीश चन्द्र बोस आज भी जीवित है विज्ञान पिपासुओं के दिल में : डॉ. प्रदीप देवघर (_________________________): विपनेट, विज्ञान प्रसार, नई दिल्ली द्वारा पंजीकृत स्थानीय साइन्स एण्ड मैथेमेटिक्स डेवलपमेंट आर्गेनाईजेशन के बैनर तले ताज ऑडिटोरियम में वतन के महान वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बोस की 157वीं जयंती मनाई गयी मौके पर आर्गेनाईजेशन के राष्ट्रीय सचिव डॉ.प्रदीप कुमार सिंह देव ने कहा -आज ही के दिन सन् 1858 को जे. सी. बोस का जन्म पूर्वी बंगाल के मेमनसिंह जिला में हुआ था । पौधों-वृक्षों में भी जीवन और चैतन्यता को प्रमाणित करने वाले बोस भले ही जिन्दा नही हैं परन्तु आज भी विज्ञानं पिपासुओं के दिल में अमर हैं । वे सूक्ष्म तरंग भौतिकी के महान् अग्रदूतों में एक थे ।6हर्ट्ज तरंगों के क्षेत्र में खोज प्रारम्भ करते हुए बोस ने महसूस किया की उन्हें उन प्राकृतिक पदार्थो का पता अवश्य लगाना चाहिए, जो सम्प्रेषित विद्युत् किरण का ध्रुवण करे । उनके अनुसार एक सजीव कोशिका में उत्तेजना के कारण जो मूल आणविक परिवर्तन होता है वह ठीक उसी प्रकार का होता है, जैसा किसी निर्जीव पदार्थ को लगातार उपयोग में लाने पर आणविक प्रतिक्रिया होती है । बोस ने जो अनुसंधान संस्थान का सपना देखा था, वह 30 नवंबर,1917 को तब पूरा हुआ जब "बोस अनुसन्धान संस्थान" की स्थापना हुई । लगभग 80 वर्ष की उम्र में 23 नवंबर,1937 को उनका स्वर्गवास हुआ । मौके पर आयोजित "वैज्ञानिक जगदीश चन्द्र बोस की देन" शीर्षक निबन्ध प्रतियोगिता में अपूर्वा कुमारी को प्रथम, निकिता प्रिया को द्वितीय जबकि आदित्य सिंह को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ । मौके पर अन्य वक्ताओँ ने भी बोस पर अपना अपना विचार रखा ।

 

PRADIP KUMAR SINGH Deo

 

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