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प्रो0 काशीनाथ सिंह ने डाॅ0 चकाचैंध ज्ञानपुरी को हास्य व्यंग्य सम्राट अलंकरण मुकुट पहनाया

 

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डाॅ0 चकाचैंध ज्ञानपुरी को प्रो0 काशीनाथ सिंह ने हास्य-व्यंग्य कवि सम्राट अलंकरण और चाॅंदी का मुकुट पहनाया। श्री काशीविश्वनाथ साहित्य-कला-संस्कृति संवर्धन संस्थान, रसवर्षा, कथ्य शिल्प, पूर्वांचल कविसेना साहित्यकार नगर बसाओ संघर्ष समिति की ओर से ख्याति लब्ध हास्य व्यंग्य कवि डाॅ0 चकाचैंध ज्ञानपुरी की षष्ठिपूर्ति के अवसर पर, पराड़कर भवन में उद्घाटनकर्ता, प्राख्यात कथाकार प्रो0 काशीनाथ सिंह के हाथों सम्मानपत्र, हास्य व्यंग्य कवि सम्राट अलंकरण-मुकुट, शाल भेंट किया गया। प्रो0 सिंह ने कहा - श् डाॅ ए0 के0 श्रीवास्तव 60 के हुये किन्तु चकाचैंध तो अभी चालीस के ही हुये। चालीस वर्षों की इनकी काव्य यात्रा ने हिन्दी जगत को चकाचैंध कर दिया है।श् हास्य व्यंग्य-परम्परा और डाॅ0 चकाचैंध ज्ञानपुरी विषयक संगोष्ठी में विषय प्रवर्तन करते हुए कवि अजित श्रीवास्तव ने कहा - श्काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के मुख्य पुस्तकालयाध्यक्ष डाॅं ए0 के0 श्रीवास्तव से डाॅ0 चकाचैंध ज्ञानपुरी तक का सफर संघर्ष और समर्पण का एक अनुकरणीय अध्याय है।श् समीक्षक डाॅं0 जितेन्द्रनाथ मिश्र - श्डाॅं0 ज्ञानपुरी ने बनारस की हिन्दी हास्य व्यंग्य कविता का परचम पूरे विश्व में लहराया है।श् डाॅं0 रामसुधार सिंह - श्चकाचैंध ज्ञानपुरी की कविताओं में व्यंग्य की मारक शक्ति अधिक है।श् डाॅं नीरज माधव ने श्डाॅ0 ज्ञानपुरी को जीवन्त कवि कहा।श् वहीं श्रद्धानन्द ने उन्हें सहज सरल और मूल्यवान कवि बताया। हास्य व्यंग्य के प्राख्यात कवि चपाचप बनारसी ने पढ़ा - श्चकाचैंध तूं त राजा ध् बजा देहला सब क बाजा ध् साठ उलट के छः क होला ध् तब तूं राजा हमसे बोला ध् समय के पहिले जाये मत ध् देखा तूं सठियाये मत ध् हमहन के कभौं भुलाये मत ध्श् वरिष्ठ पत्रकार- कवि हिमांशु उपाध्याय ने कहा - सर्वोत्कृष्ट व्यंग्य संग्रह ष्त्रिउंचष् के सर्वाधिक लोकप्रिय कवि है, चकाचैंध ज्ञानपुरी ध् प्राख्यात हास्य व्यंग्य कवि श्री साॅंड़ बनारसी ने पढ़ा - श्चकाचैंध ज्ञानपुरी साठ वर्ष पूरा किये ध् पाठा हुए पाठा यह कहावत दोहराई है ध्श्। अध्यक्षता प्राख्यात साहित्यकार पं0 धर्मशील चतुर्वेदी ने की और कहा श्आजकी हास्य व्यंग्य काव्य-धारा को डाॅ0 चकाचैंध ज्ञानपुरी ने आगे बढ़ाया है।श् इस अवसर पर लगभग दो दर्जन साहित्यिक-सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने उन्हें माल्यार्पण कर भेंट प्रदान किया। इस अवसर पर सर्वश्री डाॅं जयशंकर यादव जय, विजेन्द्र मिश्रदमदार, डाॅं0 पूर्णिमा भारतीय, अनूपखरे, गंगासहाय पांडेय, सिद्धनाथ शर्मा, डा0ॅं संजय त्रिपाठी, दीनानाथ झुनझुनवाला, डाॅं0 अशोक कुमार, डाॅं0 राजेन्द्र त्रिवेदी एडवोकेट ने अपनी शुभकामनायें देते हुए उनके दीर्घायुष्यु की कामना की। प्रारम्भ में डाॅं अशोक कुमार ;निदेशकः अघोर ट्रस्ट ग्रन्थालय, पड़ावद्ध के निर्देशन के डाॅं0 चकाचैंध ज्ञानपुरी ने श्री अघोरेश्वर का पूजन और तैलचित्र पर माल्यार्पण किया। अतं में धन्यवाद श्री किशन लाल गान्धी, निदेशक श्री रत्नसागर कला संस्थानम् ने दिया।

 

 


- अजित श्रीवास्तव
अध्यक्षः कथ्य शिल्प

 

 

 

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