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नेपाल की राजधानी काठमाण्डू में ’’अन्तरराष्ट्रीय साहित्य के परिप्रेक्ष्य में अनुवाद का महत्व’’ विषय पर दो दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

 

अमरेन्द्र सुमन

 

antaristriya sahitya


’’अन्तरराष्ट्रीय साहित्य के परिप्रेक्ष्य में अनुवाद का महत्व’’ विषय पर नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान (विश्व साहित्य तथा अनुवाद विभाग) चिन्तनधारा प्रतिष्ठान (अनामनगर) काठमाण्डू व भाषा संगम, इलाहाबाद के संयुक्त तत्वावधान में पड़ोसी मुल्क नेपाल की राजधानी काठमाण्डू (प्रज्ञा प्रतिष्ठान) में पिछले 19 व 20 दिसम्बर 2012 को आयोजित दो दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठी में भारत व नेपाल के विभिन्न प्रान्तों व विश्वविद्यालयों से पहुँचे तकरीबन 40 की संख्या में साहित्य मनीषियों ने शोध आलेखों के माध्यम से जहाँ एक ओर अनुवाद का महत्व विषय पर अपनी गरीमामय उपस्थिति दर्ज करायी, वहीं दूसरी ओर इस विषय पर आयोजित गंभीर परिचर्चा में अतिथियों ने अपने-अपने विद्धतापूर्ण विचार प्रकट किये। प्रमुख अतिथि सह नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान के कुलपति वैरागी काइँला, व नेपाल में भारत के प्रथम उच्चायुक्त अभय कुमार ने संयुक्त रुप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान के उप-कुलपति गंगा प्रसाद, नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान की सदस्य सह संयोजक व अध्यक्ष चिन्तनधारा (अनाम नगर काठमाण्डू) डाॅ0 संजीता वर्मा, भाषा-संगम के कोषाध्यक्ष सी0 एम0 भार्गव, प्रधान महासचिव डाॅ0 एम0 गोविन्दराजन तथा भारत-नेपाल के साहित्यकार मौजूद थे। नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान के कुलपति वैरागी काइँला ने वतौर मुख्य अतिथि अपने संबोधन में कहा नेपाल-भारत के बीच सिर्फ दो पड़ोसी मुल्कों का ही रिश्ता नहीं है, अपितु सांस्कृतिक, सामाजिक, आध्यात्मिक, राजनीतिक, भाषाई, रीति-रिवाज, पर्व-त्योहार व खान-पान तमाम तरह की समानताएँ दोनों देशों को एक-दूसरे देशों के साथ आबद्ध करती है। हिन्दी व नेपाली भाषा में भी गहरा रिश्ता है। दोनों ही भाषाओं की लिपि देवनागरी है, खेद इस बात कौ है कि नेपाल में लोग हिन्दी अच्छी तरह से समझते-बुझते व लिखते-पढ़ते हैं जबकि भारतीय, नेपाली भाषा की समझ तो रखते हैं वे इस भाषा को लिखने-पढ़ने से अनभिज्ञ हैं। इस अन्तर को कम करने की जरुरत है ताकि युगों-युगों से मैत्री और भाईचारे का रिश्ता अक्षुण्ण बना रहे। वैश्विक स्तर पर सर्वाधिक लोगों के बीच बोली जानेवाली भाषा हिन्दी में नेपाली साहित्कारों सहित नेपाल के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य कर रहे लोगों का प्रचार-प्रसार महत्वपूर्ण है ताकि भारत में नेपाली भाषा की जानकारी व नेपाल के सर्वांगिण विकास से जुड़े पहलुओं पर भारतीय समुदाय के बीच उसका प्रचार-प्रसार नेपाल की उन्नति में मील का पत्थर साबित हो सके। उन्होनें कहा वी0 पी0 कोईराला फाउण्डेशन, नेपाल के तत्वावधान में अनुवाद पर काफी काम किया जा रहा है। अनुवाद का महत्व वर्तमान परिप्रेक्ष्य में काफी बढ़ गया है। इस अवसर पर नेपाल में भारत के प्रथम उच्चायुक्त अभय कुमार ने कहा गुगल ट्राँन्सलेट अनुवाद के क्षेत्र में विस्तृत होता जा रहा है। अनुवाद के माध्यम से एक क्षेत्र की भाषा, सांस्कृतिक पहचान व साहित्यिक अभिरुचियों को दूसरे क्षेत्रों में पहुँचाया जा सकता है। इस शताब्दी में इसका खासा महत्व हो गया है अतः अनुवाद पर व्यापक रुप से काम किये जाने की आवश्यकता है। उप कुलपति गंगा प्रसाद ने कहा नेपाल व भारत की एक ही लिपि है। दोनों भाषा में पूरी समानताएँ हैं। हिन्दी-नेपाली भाषा के इस संगम में दोनों देशों के साहित्यिक विद्धानों की वैचारिक समानताएँ इस बात की द्योतक हैं कि हमारी सांस्कृतिक पहचान कितनी पुरानी है। हिन्दी की लगभग चालीस उप बोलियों को नेपाल में पहचान दी गई है। अनुवाद की जो समस्याएँ हिन्दुस्तान में है वही समस्याएँ नेपाल में भी है। भाषाई अनुवाद की समस्याओं पर गंभीर विचार-विमर्श आवश्यक है। भाषा संगम, इलाहाबाद के महासचिव डाॅ0 एम0 गोविन्दराजन ने कहा नेपाल में पहली मर्तवा भाषाई अनुवाद पर चिन्तनधारा प्रतिष्ठान व नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान ने अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन कर दूरियों को कम करने का प्रयास किया है। सांस्कृतिक विचारों के आदान-प्रदान से ही रिश्ते अटूट बनते हैं। इस देश के साहित्यकारों के अथक परीश्रम की वदौलत ही यह कार्य सम्पन्न हो पाया है। चिन्तन धारा प्रतिष्ठान की संयोजक व अध्यक्ष डाॅ0 संजीता वर्मा ने कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र के बाद कार्यक्रम के उद्देश्य तथा नेपाल में इस संगोष्ठी के आयोजन के आशय से आगत अतिथियों को अवगत कराया। डाॅ0 वर्मा ने इस अवसर पर अपना उद्गार प्रकट करते हुए कहा नेपाल में हिन्दी का ज्ञान तो सभी रखते हैं किन्तु हिन्दी अब तक इस देश में उपेक्षित रही है। हिन्दी भाषा में साहित्य सृजन की जो परंपराएँ भारत में रही है नेपाल उससे अब तक अछुुता रहा है। हिन्दी के प्रचार-प्रसार में भारतवंशी साहित्कारों की भूमिकाएँ नेपाल में अमृत समान हो सकती है शर्त यही है कि साहित्यकारों को इस कार्य में अपनी सहभागिता निभानी होगी। चिन्तन धारा प्रतिष्ठान की संयोजक व अध्यक्ष डाॅ0 संजीता वर्मा की सराहना करते हुए भाषा संगम इलाहाबाद के महासचिव डाॅ0 एम0 गोविन्दराजन ने कार्यक्रम के दूसरे सत्र में कहा कि नेपाल में हिन्दी के प्रचार-प्रसार में डाॅ0 वर्मा की जितनी भी सराहना की जाय कम है। इस दो दिवसीय संगोष्ठी में आन्ध्र प्रदेश से डाॅ0 राजू एस0 बागल कोट, अरुणाचल प्रदेश से डाॅ0 एस0एस0सिंह, असम से डाॅ0 देवेन चन्द्र दास सुदामा, झारखण्ड से साहित्यकार व पत्रकार अमरेन्द्र सुमन व डाॅ0 विजय कांत धर दूबे, जम्मू-कश्मीर से डाॅ0 वीणा बुदकी, गुजरात से डाॅ0 अंजना संधीर, कर्नाटका से डाॅ0 बी0 वाई0 ललिथम्बा, डाॅ0 एच0 एम0 कुमारस्वामी , केरल से डाॅ0 आर0 सुरेन्द्रन, महाराष्ट्र से डाॅ0 पद्मा जी0 पाटिल व डाॅ0 नरेन्द्र ढंढारे, उड़ीसा से डाॅ0 संकरला पुरोहित, राजस्थान से श्री के0सी0 गोस्वामी व श्रीमती ममता गोस्वामी, तमिलनाडू से डाॅ0 एस0प्रीती, मो0 स्वाईदूल इस्लाम, डाॅ0 कामाकोटि,डाॅ0 एस0 भारथ कुमार, डाॅ0 मधु धवन, डाॅ0 मधुमेखलाई, उत्तर प्रदेश से भाषा संगम के महासचिव डाॅ0 एम0 गोविन्दराजन, श्रीमती रीतू गौढ़, आर0सी0मिश्रा, श्री विजय चित्तौरी, श्री अश्विनी कुमार साहू, श्री सी0एम0भार्गव, श्रीमती अबन भार्गव, श्री जय प्रकाश चतुर्वेदी व श्रीमती नीलम चतुर्वेदी तथा पश्चिम बंगाल से डाॅ0 रामचन्द्र राय, डाॅ0 सुभाष चंद्र राय व डाॅ0 सत्यनारायण भट्टाचार्य ने अपने-अपने शोध आलेख प्रस्तुत किये। नेपाल में भोजपुरी साहित्य में विशिष्टता रखने वाले गोपाल अश्क व अन्य को विभिन्न उपाधियों से इस अवसर पर सम्मानित किया गया। डाॅ0 संजीता वर्मा को हिन्दी में उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिये भाषा संगम की ओर से सम्मानित किया गया। चिन्तन धारा प्रतिष्ठान के कर्मठ प्रबंधकों गणेश कुमार वर्मा, सोनल राज वर्मा व सुमित राज वर्मा को भी इस अवसर पर भाषा संगम की ओर से उनके बेहतर आतिथ्य सत्कार के लिये सम्मानित किया गया। नेपाल के काठमाण्डू स्थित पशुपतिनाथ महादेव के दर्शनार्थ मंदिर स्थल पहुँची भारतीय साहित्यकारों के दल का पूरे जोशो-खरोश से पशुपति क्षेत्र विकास कोष ने स्वागत किया। इस अवसर पर कोष के महासचिव व कोषाध्यक्ष ने कहा भारत में चार धाम हैं और पाॅचवा व अंतिम धाम नेपाल का पशुपति धाम है। भारत से धर्माथियों का आगमन इस देश में अधिक से अधिक हो इसका ध्यान रखा जाना चाहिए ताकि टूरिस्टों के माध्यम से नेपाल की आर्थिक उन्नति संभव हो सके। इस अवसर पर संध्या आरती का सीधा लुफत उठाया भारतीय साहित्यकारों नेै। पशुपति क्षेत्र विकास कोष के तत्वावधान में साहित्यकारो को इस अवसर पर चादर ओढ़ाकर सम्मानित किया गया व प्रसाद तथा रुद्राक्ष का माला भेंट किया गया। नेपाली साहित्कार नवीन चित्रकार ने भारतीय साहित्यकारों के एक दल को अपनी संस्था के तत्वावधान में सम्मानित किया गया।
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