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रचना गौड़ ‘भारती’ की पुस्तक ‘मन की लघुकथाएं’ का लोकार्पण

 

manlaghukatha

 

 

अखिल भारतीय साहित्य परिषद के तत्वाधान में भारतेन्दु समिती सभागार के मंच पर लेखिका रचना गौड़ ‘भारती’ की पुस्तक ‘मन की लघुकथाएं’ का विमोचन हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार श्री भगवती प्रसाद गौतम ने की। मुख्य अतिथी आगरा से पधारीं डाॅ0 सुषमा सिंह, विशिष्ट अतिथी कथाकार अन्नपूर्णा श्रीवास्तव थीं, कृति परिचय कहानीकार मीनू त्रिपाठी ने दिया। पूज्या महामण्डलेश्वर हेमा सरस्वती जी ने आशीर्वचनों द्वारा अपना आशीर्वाद प्रदान किया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्जवलन से हुआ। तत्पश्चात् श्रीमती वन्दना गुप्ता ने सस्वर सरस्वती वन्दना से सम्पूर्ण वातावरण संगीतमय बनाया। मंच संचालन प्रख्यात साहित्यकार रामेश्वर शर्मा उर्फ़ ‘रामू भैया’ ने अपने अंदाज़ में किया। श्री भारत रत्न गौड़ ने कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री भगवती प्रसाद गौतम का माल्यार्पण कर अभिनन्दन किया। श्रीमती प्रमिला आर्य ने पूज्या हेमा सरस्वती जी का माल्यार्पण किया। श्रीमती शशि गौड़ ने मुख्य अतिथि सुषमा सिंह का माल्यार्पण कर स्वागत किया। श्रीमती रचना गौड़ ‘भारती’ ने महामण्डलेश्वर हेमा जी को माला पहना अभिनन्दन किया। श्रीमती वन्दना गुप्ता ने डा0अन्नपूर्णा श्रीवास्तव का माल्यार्पण किया।

 


श्रीमती मीनू त्रिपाठी ने कृति परिचय करते हुए कहा-‘‘रचना जी की ‘मन की लघुकथाएं’ पुस्तक में पूर्ण संवेदनशीलता है जो सामाजिक सरोकार से जुड़ी है और सभी रचनाएं समाज में एक रोशनी की ओर इंगित करती हैं।’’ पुस्तक विमोचन का समय आया और सम्पूर्ण मंच ने पुस्तक अनावरित कर लोकार्पित की। रामेश्वर शर्मा ने ‘पानी का बुलबुला’ लघुकथा का पठन किया।

 



डाॅ0 सुषमा सिंह ने कहा- आजकल लघुकथाओं के प्रति आकषर्ण बढ़ रहा है और कथाएं जीवन से जुड़ी होने के कारण मन को हर प्रकार से प्रभावित करती हैं। मैंने पढ़ा और देखा कि कथाओं पर लोकोक्तियों की बिहारी के दोहों जैसी मारक क्षमता होती है और रचना गौड़ ‘भारती’ की रचनाएं ऐसी ही हैं। लोकोक्तियों को कहानी का उदाहरण कह सकते हैं। सारी कथाओं में पूरा समावेश उसकी सार्थकता प्रस्तुत करती है। डाॅ0 अन्नपूर्णा ने कहा- लघुकथाओं में आपने जो किया है वह मन को मोहने वाला और सामाजिक सरोकारों से प्रकृति के साथ एक सामन्जस्य के साथ लेखन किया है। कथाओं में धार्मिक अभाव के अच्छे प्रस्तुतिकरण का ज़िक्र किया, साथ ही कथाओं को जानवरों व इंसानों के बीच का सामन्जस्य से ओत प्रोत माना। पारिवारिक वस्तुस्थिति पर आपने बड़ा अच्छा लिखा है। सारी लघुकथाएं पाठको के मन को झिंझोड़ देती हैं। मीनू त्रिपाठी ने एक लघुकथा ‘हृदय परिवर्तन’ पढ़ी।

 


कृतिकार रचना गौड़ ‘भारती ’के उद्गार- हर व्यक्ति कोई न कोई सोच रखता है वही सोच किसी के काम आ जाए तो वह पंक्तियों में परिणत हो जाती है। मेरा प्रयास है कि हम नैतिक उत्थान के लिए सदा कार्य करते रहें।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथी डा0 सुषमा सिंह का गौड़ परिवार द्वारा अपने पिता विश्व ज्योतिष सम्राट स्व0 श्री रघुनन्दन प्रसाद जी की स्मृति में एक स्मृति सम्मान पत्र भेंट किया एवं शाॅल ओढ़ाकर सम्मानित किया। शशि गौड़ द्वारा डा0 अन्नपूर्णा जी का शाॅल के साथ सम्मान किया गया। श्री बलवन्त सिंह हाड़ा साहब एवं उनकी पत्नी श्रीमती कृष्णा हाड़ा ने महामण्डलेश्वर हेमा जी का शाॅल ओढ़ा कर सम्मान किया। भगवती प्रसाद गौतम और रामेश्वर शर्मा को भारत रत्न गौड़ द्वारा शाॅल ओढ़ा कर सम्मान किया।

 


महामण्डलेश्वर हेमा जी के अनुसार स्कूल, काॅलेज में एक कालांश ऐसा हो जिसमें ऐसी कथाओं का समावेश होना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन रामेश्वर शर्मा ‘‘रामू भैया’’द्वारा किया गया ।

 


भगवती प्रसाद गौतम ने अपने उद्बोधन में कहा- श्रीमती रचना गौड़ ‘भारती’ का नाम सात-आठ वर्ष पूर्व सुना और इनकी कविताएं अनेक पत्र पत्रिकाओं में पढ़ी। ये पहले कवयित्री थीं, फिर रसोई की रेसेपी की पुस्तक और अब लघुकथा संग्रह का सृजन इनके विवरण में शामिल है। हालांकि इससे पूर्व कई कथाकारों ने अपनी कथाएं लिखीं। आज रचना जी के लेखन पर मैं अपनी बधाई देता हूं। इस पुस्तक का मुखपृष्ठ आवरण बड़ा प्रभावकारी है। उन्होंने 83 कथाओं को अनुभव की अनुभूति बताया जिनमें पूर्ण सामाजिक, पारिवारिक व प्राकृतिक चीज़ों का समावेश है और सही मायने में सब कथाएं जन गण मण की कथाएं हैं, जो साहित्य का दर्पण हैं। इस समय की महिला द्वारा लिखा ऐसा साहित्य संभावना से परिपूर्ण है।