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विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ द्वारा 'भारत गौरव सम्मान'से नवाजे जायेंगे डॉ. प्रदीप सिंह देव

 

 

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विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ द्वारा 'भारत गौरव सम्मान'से नवाजे जायेंगे डॉ. प्रदीप सिंह देव देवघर (______________________________): अपने शहर के विवेकानन्द शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान के केन्द्रीय अध्यक्ष, योगमाया मानवोत्थान ट्रस्ट के राष्ट्रीय सचिव, ओमसत्यम् इंस्टिट्यूट ऑफ फिल्म, ड्रामा एण्ड फाइन आर्ट्स के निदेशक तथा साइंस एण्ड मैथमेटिक्स डेवलपमेंट आर्गेनाईजेशन के राष्ट्रीय सचिव डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव को विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ के बैनर तले आयोजित होने वाले इसके 20वाँ दीक्षांत सह सारस्वत सम्मान समारोह में रेशमी शहर भागलपुर के एक सभागार में साहित्य, कवितापाठ, नाटक, फिल्म, समाजसेवा एवं चित्रांकन के क्षेत्र में विशेष उपलब्धि प्राप्ति हेतु 'भारत गौरव सम्मान पुरस्कार' की मानद उपाधि से अलंकृत एवम् विभूषित किया जायेगा । इसकी जानकारी विद्यापीठ के कुल सचिव डॉ. देवेन्द्र नाथ साह ने पत्र के माध्यम दी । ज्ञात हो कि डॉ. देव को इसके पूर्व चित्रांकन में 'अंकन नंदन', 'अंकन भारती' ; कवितापाठ में 'आवृत्ति भारती', 'आवृत्ति नंदन, ; नाटक में राजीव गाँधी कला मंदिर, पोंडा, गोवा में विरजु महाराज के करकमलों से 'नाट्य भारती' कोलकाता में 'नाट्य नन्दन' ; शिक्षा के क्षेत्र में 'नंदनश्री', 'विद्या वारिधि', 'विद्यासागर', 'राष्ट्रीय दियारा फ़ेलोशिप ऑनर अवार्ड'; साहित्य के क्षेत्र में 'काव्यदीप', 'स्वामी विवेकानंद राष्ट्रीय शिखर सम्मान', 'पोद्दार रामावतार अरुण राष्ट्रीय शिखर सम्मान', 'गोस्वामी तुलसीदास राष्ट्रीय शिखर सम्मान' ‛काव्यश्री सम्मान' ; समाजसेवा के क्षेत्र में 'प्रताप सम्मान', 'पाञ्चजन्य समाजसेवीश्री', स्वर्ण पदक व अन्य कई पुरस्कारों से अलंकृत किया जा चूका है । कई पुस्तकों के लेखक डॉ. देव द्वारा लिखित 'वैद्यनाथ माहात्म्य', 25 महापुरुषों की जीवनियाँ काव्य संकलन के रूप में'अमृतवर्षी मानव रत्न', आगरा के ताज महल में लोकार्पित 'पारो की याद में', भगवान शिव सम्बंधित 'भक्तों की मुराद पूरी करते हैं दानी बाबा बैद्यनाथ', 'साइंस डिक्शनरी फॉर जूनियर्स' आदि काफी चर्चित है । डॉ. देव को इंग्लैंड की क्वीन एलिज़ाबेथ, पूर्व प्रधानमंत्री टॉनी ब्लेयर,फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी, नेपाल नरेश ज्ञानेन्द्र , भारत के पूर्व एवं वर्त्तमान राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री, पूर्व डायरेक्टर एंड यूनेस्को रिप्रेजेन्टेटिव टू इंडिया प्रो.एम. तौफ़िक, भिन्य राज्य के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री प्रशस्ति पत्र भेज चुके हैं। छातना राजगढ़ व काशीपुर पंचकोट राजवाड़ी के वंशज डॉ. देव के पिता श्यामल कुमार सिंह देव माइनिंग मेनेजर थे परन्तु जब देव की आयु चार वर्ष की थी तब वे वैराग्य ले लिए । माता की छत्रछाया में दीनबंधु मध्य विद्यालय में देव की पढ़ाई की शुरुआत हुई । वर्ष 1997में माता योगमाया सिंह देव भी वैराग्य की राह पर चल पड़ी । देव के पांच भाई बचपन में ही गुजर गए थे । वर्तमान में दो बहनें हैं जिनकी शादी हो चुकी है । 1997 से एक अनाथ की जिन्दगी जीने वाले देव ने वर्ष 1994 में विवेकानन्द संस्थान (तब उसका नाम विवेकानन्द भ्रातृ संघ था ) की स्थापना की और समाजसेवा में कूद पड़े । विद्यार्थियों के बीच खेलकूद, चित्रांकन, क्विज, भाषण, संगीत व नृत्य, निबंध आदि प्रतियोगितायों का आयोजन करना एवम् राष्ट्र समर्पित व्यक्तियों को सम्मानित करना ही डॉ. देव का मुख्य उद्देश्य है । अबतक लगभग 3000 से अधिक व्यक्तियों एवं 35000 से अधिक विद्यार्थियों को पुरस्कृत कर चुके हैं डॉ. देव । श्री श्री रामकृष्ण परमहंस देव की 175 वीं, विश्वकवि रवीन्द्र नाथ टैगोर तथा विवेकानन्द की 150वीं जयंती के अवसर पर क्रमशः 175, 150, 150 उनकी तस्वीर वतन के विभिन्न व्यक्तियों को समर्पित कर चुके हैं । गीतांजलि शतवार्षिकी के अवसर पर 100 व्यक्तियों को सम्मानित एवं गीतांजलि पुस्तक समर्पण कर चुके हैं । ट्यूशन की पूरी कमाई समाजसेवा में डॉ. देव वर्षों से खर्च करते आ रहे हैं। रूबी फिल्म्स, कोलकाता के बैनर तले 'जीवन संग्राम' फिल्म में अपनी अदा से चर्चित डॉ. देव को उनकी सफलता के लिए देवघरवासियों ने शुभकामनायें दी ।

 

 

 

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