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डाॅ0 प्रतिभा राजहंस को उनके उपन्यास के लिये सम्मानित

 

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डाॅ0 प्रतिभा राजहंस को उनके उपन्यास के लिये सम्मानित


स्व0 सतीश चन्द्र झा की 84 वीं जयंती के अवसर पर सतीश स्मृति मंच के तत्वावधान में 29 जनवरी को क्वार्टरपाड़ा में विचार गोष्ठी, कवि सम्मेलन व सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भागलपुर विवि के हिन्दी विभाग के प्रोफेसर डाॅ0 प्रतिभा राजहॅस को उनके उपन्यास प्रतिशोध के लिये स्मृति चिन्ह, अंकवस्त्र व प्रशस्तिपत्र से सम्मानित किया गया। सिदो कान्हु मुर्मू विवि के प्रति कुलपति डाॅ0 रामयतन प्रसाद ने डाॅ0 प्रतिभा को सम्मानित किया। इस अवसर पर हिन्दी साहित्य के विद्वान व प्रखर वक्ता डाॅ0 मनमोहन मिश्र, डाॅ0 रामवरण चैधरी, व अन्य लोग मौजूद थे। हिन्दी साहित्य की सेवा में अनवरत खुद को शामिल करने वाले गोड्डा काॅलेज के प्रोफेसर डाॅ0 श्याम सुन्दर घोष व जनवादी लेखक संघ से जुड़े रहे रजनीकांत राकेश को उल्लेखनीय सेवा के लिये सम्मानित किया गया। दो सत्रों में सम्पन्न कार्यक्रम के पहले सत्र का उद्घाटन अनुमण्डलाधिकारी, दुमका राम नारायण राम ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर वतौर विशिष्ट अतिथि मौजूद थीं पूर्व उप कुलपति सिदो कान्हु मुर्मू विवि दुमका डाॅ0 प्रमोदनी हाॅसदा। मुख्य वक्ता के रुप में पाकुड़ के विद्वान डाॅ0 मनमोहन मिश्र ने समकालीन हिन्दी कविता और संस्कार विषय पर अपने व्याख्यान दिये। उन्होनें कहा प्रतिभा, व्यूत्पत्ति व अभ्यास का योग हो तो ही कोई कवि अपनी बातें रख सकता है। हिन्दी साहित्य में अज्ञेय ने इसे रखा। कविता, उसके मूल स्वभाव, उसके संस्करण, और मिमांसा के विषय में अज्ञेय ने जो बातें रखी उसे काटने की हिम्मत किसी में नहीं। उन्होनें कहा भाषा का अवदान प्रकृति ने दिया है। व्याकरण मनुष्य की बनायी चीज है। उन्होनें कहा काल अपने आप में सागर की तरह असीम है। कविता चाहे समसामयिक हो या फिर चिरंतर, उस स्तर तक पहुॅचना होगा। एस0पी0काॅलेज, दुमका के हिन्दी विभाग के प्रोफेसर डाॅ0 खिरोधर प्र0 यादव, डाॅ0 अमरेन्द्र कु0 सिन्हा ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किये। दो सत्रों में संचालित कार्यक्रम का प्रथम सत्र समकालीन कविता और काव्य संस्कार पर विचार गोष्ठी के रुप में निर्धारित था जबकि द्वितीय सत्र में कवि सम्मेलन व सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। मंच के अध्यक्ष शम्भु नाथ मिस्त्री की उपस्थिति भी कार्यक्रम में अंत-अंत तक बनी रही। कविता में मन को छूने का सामथ्र्य होनी चाहिऐ, यह विचार युवा कवि राहुल राजेश ने व्यक्त किया। देवघर से साहित्यकार तारा चंद्र खवाड़े, शंकर मोहन झा, धनंजय प्रसाद, अमरेन्द्र सुमन, अशोक सिंह, उमा शंकर राव, सुरेश प्रकाश, श्वेताभ, प्रदीप प्रभात, ब्रहमदेव मंडन, धनेश्वर प्रसाद पंडित, ओम प्रकाश मंडल, जय प्रकाश महतो, राजीव नयन तिवारी इत्यादि मौजूद थे। कार्यक्रम में साहित्यिक चर्चा व कवि सम्मेलन की शुरुआत सरस्वती वन्दना व डाॅ0 राम वरण चैधरी द्वारा लिखित भजन से प्रारंभ हुआ। स्व0 सतीश चंद्र झा की पत्नी चंपा देवी, विद्यापति झा, पवन कु0झा, प्रो0 नूतन झा, अमित कुमार, अर्नव कुमार, अदिति कुमारी, अमृता झा व स्वप्नील झा ने भी पूरी व्यवस्था को सुचारु बनाऐ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मंच का संचालन साहित्यकार अशोक सिंह ने किया।

 

 

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