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सुकीर्ति भटनागर को प्रभा स्मृति बाल साहित्य सम्मान

 

 

सुकीर्ति भटनागर को प्रभा स्मृति बाल साहित्य सम्मान
पत्रिका ‘बाल प्रभा‘ और डा. नागेश् की पुस्तक का हुआ विमोचन

 

 

शाहजहांपुर

 

sbhatnagar


गाँधी पुस्तकालय द्वारा चतुर्थ प्रभा स्मृति बाल साहित्य सम्मान इस
बार पटियाला, पंजाब की प्रख्यात बाल साहित्यकार सुकीर्ति भटनागर को
प्रदान किया गया।
सम्मान स्वरुप उन्हें प्रशस्ति पत्र, प्रतीक चिन्ह, अंग वस्त्र, नारियल
और तीन हजार एक सौ रूपये की राशि भेंट की गई।
इस अवसर पर बाल पत्रिका बाल प्रभा के नए अंक का विमोचन भी संपन्न हुआ।
कुलदीप दीपक द्वारा सरस्वती वंदना से प्रारंभ इस समारोह में सर्वप्रथम
पुरस्कार एवं सम्मानित लेखिका का परिचय आयोजक कवि अजय गुप्त ने कराया।
मुख्य अतिथि लखनऊ क्रिश्चियन् डिग्री कालेज के हिंदी विभागाध्यक्ष
प्रख्यात बाल साहित्यकार् डा. सुरेंद्र विक्रम ने कहा कि समाज बहुत तेजी
से बदल रहा है। संक्रमण के इस दौर में बच्चों को नैतिक मूल्यों से जोड़ने
का प्रयास करने वाले सही मायनों में देश् के भविष्य के हितचिंतक है।
जिलाधिकारी डा. राजमणि यादव ने कहा कि इतिहास साक्षी है कि सामाजिक
परिवर्तन हमेशा उच्चकोटि के साहित्य के माध्यम से ही हुआ है।
विशिष्ट अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष तनवीर खां ने कहा कि पुस्तकालय ने यह
पुरस्कार प्रारंभ कर जनपद का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। बच्चों
को अच्छा साहित्य उपलब्ध कराना समाज का नैतिक दायित्व है।
सम्मानित साहित्यकार सुकीर्ति भटनागर ने अपने वक्तव्य में कहा कि जिस
आत्मीयता और भावना के साथ आज उनका सम्मान किया गया है, उसके लिए उनके पास
शब्द नहीं है।
चिंतक कवि अरविन्द मिश्र ने कहा कि हम रोली अक्षत के माध्यम से जब किसी
विभूति का सम्मान करते है तो उसकी गंध हमारी अंगुलियों को ही नहीं हमारी
आत्मा को भी महका देती है।
समारोह अध्यक्ष - डा. सत्यप्रकाश् मिश्र ने कहा कि साहित्य सबसे बड़ी
पूंजी है जिसे अपनी सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए हमें अपनी संतति
को हस्तांतरित करना चाहिए। बच्चों के कोमल मन पर जो बात बैठ जाती है वह
आजन्म उनके साथ रहती है।
इस मौके पर सुकीर्ति भटनागर के उपन्यास अमरो और नागेश पांडेय ‘संजय’ की
पुस्तक जो बूझे वह चतुर सुजान का विमोचन अतिथियों ने किया।
बदलते समाज में बाल साहित्य की भूमिका विषय पर संगोष्ठी और बाल कविता पाठ
भी संपन्न हुआ।
समारोह में बसंत लाल खन्ना, ओम प्रकाश् अडिग,चन्द्र मोहन दिनेश , विजय
कुमार, ओंकार मनीषी, डा. राजकुमार शर्मा,, अरविन्द मिश्र, दिनेश रस्तोगी,
रामकुमार गुप्त, फहीम करार, देशबंधु, डा. अरसद खान, डा. साजिद
खान,ज्ञानेंद्र मोहन ज्ञान, अनूप गुप्त, ब्रजेश् मिश्र, ब्रजेश् पांडे,
डा. बलवीर शर्मा,, दीपक कंदर्प, आशा गुप्ता, अरविद राज, प्रवीण, सुनील,
आदि अनेक, वुद्धिजीवी साहित्यप्रेमी उपस्थित थे। संचालन डा. नागेश
पांडेय ‘संजय’ और आभार शिवाजी गुप्त ने व्यक्त किया।

 

 


-अजय गुप्त

 

 

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