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डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की 131वीं जयंती मनाई गई

 

 

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डॉ. राजेन्द्र प्रसाद सरलता, कर्तव्यनिष्ठा व ईमानदारी के पर्याय थे :डॉ. प्रदीप देवघर(_____________________): भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद भारतीय जनता के सच्चे प्रतिनिधि थे । इतना बड़ा पद पाकर भी वे नम्रता और सादगी के अवतार थे । उनका सम्पूर्ण जीवन भारतीय मूल्यों, आदर्शो एवं राष्ट्रीयता की अद्भुत मिसाल था । वे सरलता, कर्तव्यनिष्ठा व ईमानदारी के पर्याय थे । वे गांधीवादी विचारधारा के प्रबल समर्थक व कर्मठ नेता थे .....उक्त बातें डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की 131 वीं जयंती के अवसर पर ताज ऑडिटोरियम में विवेकानंद शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवम् क्रीड़ा संस्थान के बैनर तले आयोजित "डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की देन" संगोष्ठी में संस्थान के केन्द्रीय अध्यक्ष डॉ.प्रदीप कुमार सिंह देव बच्चों को जानकारी की तौर पर बता रहे थेँ । डॉ.देव ने आगे कहा-आज ही के दिन सन् 1884 को बिहार राज्य के सीवान जिले के जीरादेई ग्राम में हुआ था । उनकी प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही हुई थी । बिहार, ओड़िसा बंगाल इन तीन राज्यों में वे मैट्रिक की परीक्षा में प्रथम आए थे । डॉ. राजेन्द्र प्रसाद राष्ट्र के सच्चे सेवक थे । समय के बड़े ही पाबन्द थे । दिन-भर का समय लोगों से मिलने-जुलने तथा सार्वजनिक कार्य में देते थे ।छोटे-से-छोटे लोगों से बड़े ही प्रेमपूर्वक मिलते थे और उनकी समस्यायों का समाधान भी करते थे । देश के स्वतंत्रता आंदोलन में उनका विशेष योगदान था । 1905 के बंग-भंग आंदोलन में उन्होंने सक्रिय रूप से भाग लिया । 1921 में प्रिंस ऑफ़ वेल्स के भारत आगमन पर बिहार में विरोध शुरू कर दिया ।10 मार्च को विधानसभा में जाकर इसके खिलाफ आवाज़ उठाई । उन्होंने गांधीजी के रचनात्मक कार्यों-चरखा कातना, खादी का प्रचार, मद्य निषेध, अस्पृश्यता निवारण, हिन्दू-मुस्लिम एकता को आगे बढ़ाया । 15 अगस्त, 1947 को भारत के स्वतंत्र होने के बाद खाद्य मंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की । भारत के गणतंत्र बनने के बाद वतन के प्रथम राष्ट्रपति पद पर आसीन हुए । 12 वर्ष तक सफलतापूर्वक कार्य करते हुए 14 मई, 1962 को अवकाश ग्रहण किया । अवकाश के बाद वे सदाकत आश्रम में रहने चले गए । 28 फरवरी, 1963 को उनका देहावसान हो गया । मौके पर आयोजित "भारत की आज़ादी में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की देन" शीर्षक निबन्ध प्रतियोगिता में ख़ुशी कुमारी को प्रथम, प्रीति कुमारी को द्वितीय एवम् राज आर्यन को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ । मौके पर अन्य वक्ताओं ने भी विषय वस्तु पर प्रकाश डाला ।

 

 

 

PRADIP KUMAR SINGH Deo

 

 

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