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डॉ रमेश नीलकमल का यूँ चले जाना --- 25 मई 2013 को जमालपुर में निधन

 

 

डॉ रमेश चन्द्र नीलकमल के रचना संसार तथा उनसे अनेक बार व्यक्तिगत चर्चा पर आधारित उनकी कृतियों के नामों एवं विचारों को संजोती एक रचना --------



आसान नहीं होता है ,'कवियों पर कविता' लिखना ,
जग में रह कबीर बन जाना ,कीचड़ में कमल सा खिल जाना ।

 

होता है कोई नीलकमल , कीचड़ में खिल जाता है
बिना देख-रेख माली के , निज पहचान कराता है ।

 

कलपुर्जों में जीवन बीता ,'शब्द कारखाना ' निर्माण किया ,
साहित्य को रमेश प्रसाद ने , एक नया आयाम दिया ।

 

कभी पूछता 'बोल जमूरे' ,'आग और लाठी ' देखी है ,
कभी खडा 'अपने ही खिलाफ', 'कवियों पर कविता' लिखता है ।

 

'गमलों में गुलाब' उगाता , 'राग-मकरंद 'गाता है ,
'अलगअलग देवताओं ' पर , शब्दों के फूल चढ़ाता है ।

 

'काला दैत्य और राजकुमारी 'की,कथा कहानी कहता है ,
दलित चेतना का प्रतीक ,'नया घासी राम ' बताता है ।

 

'एक और महाभारत ' को, भविष्य में देख रहा,
'समय के हस्ताक्षर ' बन , पुस्तक में लिख देता है ।

 

मरने से पहले चाहता ,अपनी एक वसीयत लिखना ,
बिना काष्ठ शब्दों के साथ ,तिल -तिल जलना चाहता है ।

 

जीऊं जब तक शब्दों के ,संग मर जाऊं तो शब्दों के संग ,
'किताब के भीतर किताब' सा ,आज सिमटना वह चाहता है ।

 

तुलसी- सुर सभी बन जाते ,नहीं कबीर कोई बनाता ,
कमल खिले हैं सारे जग में ,'नीलकमल ' कोई खिलता है ।

 


(डॉ अ कीर्तिवर्धन )

साहित्य का यह कुशल चितेरा 76 वर्ष की आयु में दिनांक 25 मई 2013 को हमारे बीच से प्रस्थान कर गया । हिंदी साहित्य जगत को 2 6 मौलिक कृतियों से समृद्ध करने वाले इस महान साहित्यकार की 1 6 सम्पादित पुस्तकें हैं । आप " शब्द कारखाना" तथा "वैश्यवसुधा " जैसी प्रमुख पत्रिका के संपादक रहे हैं ।
आपके कार्य का मूल्यांकन कराती हुई 1 6 पुस्तकें हैं ,3 शोध प्रबंध भी आपके साहित्य की पड़ताल करते हुए आपके कार्य का समग्र मूल्यांकन करने में सफल रहे हैं ।
आपका जन्म 2 1 नवम्बर 1937 को बिहार के रामपुर डुमरा (पटना) में हुआ था। वर्तमान में आप जमालपुर (बिहार) में निवास करते थे । आपके परिवार में 3 पुत्र व 3 पुत्रिया हैं ।
उनका श्राद्ध कर्म दिनांक 06 जून को जमालपुर (बिहार ) में किया जाएगा ।

 

 

इस दुःख की घडी में अपनी संवेदनाये व्यक्त करता हूँ ।

 

आपके जाने से यहाँ अँधेरा नहीं होगा ,
आपकी यादों के चिराग हर राह जलाएंगे ,
आपके अन्तश से खिले जो फूल साहित्यासागर में ,
उनकी खुशबू से सारे जग को मह्कायेंगे ।

 

डॉ अ कीर्तिवर्धन
अध्यक्ष
अखिल भारतीय साहित्य परिषद्
(मुज़फ्फरनगर ईकाई )

 

 

 

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