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सहकारिता से ही संभव है आर्थिक उन्नति और संस्कारित समाज का निर्माण - देवांगन सिवनी -


 भारत का समग्र विकास और संस्कारित समाज का निर्माण सहकारिता के
माध्यम से ही संभव है भारत की आधारशिला ही सहकार पर खड़ी हुई है । सहकार
पर बाजारवाद और पूंजीवाद के अतिक्रमण के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था और
सामाजिक संरचना विकृत हो गई है उस मूल स्वरूप को जब तक पुन: स्थापित नहीं
किया जायेगा समाज को सहकार से नहीं जोड़ा जायेगा भारत का समग्र विकास
संभव नहीं है यह बात सहकार भारती के एक दिवसीय बाहुवली लॉन में आयोजित
सम्मेलन को संबोधित करते हुये सहकार भारती के राष्टीय संगठन मंत्री विजय
देवांगन ने अपने संंबोधन में कही उन्होंने सहकारिता के महत्व को
प्रतिपादित करते हुये लगभग एक घण्टे का उदबोधन दिया जिसमें उपस्थित सभी
श्रोताओं ने पूरी एकाग्रता के साथ उस उदबोधन को सुना इस अवसर पर सहकार
भारती के क्षेत्र प्रमुख डॉ यतीन जी, सहकार भारती के प्रांतीय महामंत्री
अशोक तेकाम, भाजपा के जिला संगठन मंत्री संतोष त्यागी, भाजपा जिला
महामंत्री अजय त्रिवेदी, भाजपा कोषाध्यक्ष संतोष अग्रवाल, भाजपा नेता
गजेन्द्र भगत, सहकार भारती के जिला अध्यक्ष तरूण विश्वकर्मा मंचासीन रहे
इस अवसर पर अनेक विकासखण्डों से सहकारिता क्षेत्र के सदस्य पदाधिकारी
स्वसहायता समूह एवं सहकार भारती के कार्यकर्ता पदाधिकारी बड़ी संख्या में
उपस्थित रहे ।

सहकार भारती के राष्टीय संगठन मंत्री विजय देवांगन ने कहा कि परस्पर
सहयोग और एक लिये सब और सबके लिये एक का समर्पण की भावना हमारी संस्कृति
रही है और इन्हीं संस्कारों ने समाज को एकसूत्र में पिरो कर रखा है यही
तो सहकार है इस भावना से कार्य करने में जहां आर्थिक समानता और अर्थ का
सही परिमाप में विभाजन होता है वहीं बंधुत्व भाव का भी इसमें समावेश होता
है हमारे यहां कि ऋषि और कृषि परंपरा भी इसी भाव से कार्य करने की
प्रेरणा प्रदान करते रहा है परंतु पूंजिवाद ने जिस बाजार का निर्माण किया
है उससे सहकारिता का भाव कमजोर हुआ और समाज में धीरे-धीरे विकृतियां आती
रही है । आज देश आर्थिक रूप से भले विश्व मानचित्र पर संपन्न हुआ हो
परंतु देश में गरीबी का प्रतिशत बढ़ा है हमें ऐसे भारत का निर्माण नहीं
आर्थिक समानता के साथ संपन्न भारत का निर्माण करना है और इसी संकल्प के
साथ सहकार भारती कार्य कर रही है । इस क्षेत्र में कार्य करना कठिन अवश्य
है परंतु कार्य करने में आनंद भी आता है सहकार भारती के माध्यम से
सहकारिता को देश भर में अच्छा प्रतिसाद प्राप्त हो रहा है । हर हाथ को
काम देने की दिशा में सहकार भारती ने देश भर में कार्य करने का संकल्प
लिया है अनेक क्षेत्रों में समाज के छोटे-छोटे वर्गों को रोजगारोन्मुखी
कार्य प्रदान कर उन्हें लाभ दिया गया है । मजदूर किसान, घरेलू महिलाओं को
सहकारिता से जोड़कर उन्हे लाभ प्रदान किये गये ऐसे ही प्रयास और तेज हो
तभी पंडित दीनदयाल उपाध्याय की भावना के अनुरूप अंतिम पंक्ति के व्यक्ति
के बारे में और दीन हीन व्यक्ति का विकास और उसकी सेवा संभव है। सहकार
भारती यह सकारिता एवं भारत माता के लिये समर्पित कार्यकर्ताओ का एक संगठन
है यह स्वयं एक सहकारी संस्था नही है, बल्कि सहकारिता की शुद्धि, वृद्धि,
प्रगति प्रचार हेतु बना हुआ एक संगठन है। सहकारिता समाज के निर्माणकाल से
ही रही है, आज भी सहकारिता के द्वारा व्यक्ति अपने समय श्रम तथा धन की
बचत करता है। सहकारिता केवल आर्थिक उद्गम नही है यह आर्थिक सेवा भी है
सहकार भारती का एक मात्र धेय है समाज के हर वर्ग में आर्थिक स्थिति
सुदृृृण हो। विजय देेेवांगन ने कहा कि सिवनी जिले में भी सहकारिता के
माध्यम से आर्थिक उन्नति के द्वार खुले इसके लिये सहकार भारती के माध्यम
से तेज प्रयास प्रारम्भ करने की आवश्यकता है। सहकारभारती का सदस्यता
अभियान तेज करने की आवश्यकता पर बल दिया।

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