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समझो भारत समझो : अपूर्वा गुप्ता की मुहिम

 

 

गिरीश बिल्लोरे “मुकुल ”

 

samjhobharat


बालभवन जबलपुर की ‪#‎अपूर्वा के अपने सपने हैं अपनी सोच है मौलिक चिंतन है तलाश की जिद्द है उसमें . मुझे नहीं मालूम कि क्या क्या और कितना सोचना चाहिए बच्चों को पर हाँ इतना ज़रूर जानता हूँ कि अपूर्वा की तरह थोड़ा थोड़ा न केवल बच्चों को वरन मुझे भी सोचना ही होगा . अपूर्वा ने बच्चों के साथ मिलकर आज दो अक्टूबर 2015 को एक प्लान बनाया . अपना प्लान पूरा होता देख माँ और चाचा की मदद से अपूर्वा घर के नज़दीक वाले यादव कॉलोनी चौक पर साथियों के साथ जा पहुँची .. भीड़ आती जाती रही कुछ देखते कुछ न देखते अपने गंतव्य को आ-जा रहे थे . सबको छोटी छोटी दफ्तियों पर लिखे सन्देश देने बेताब बच्चों को देख कुछ लोगों का मन अधिक भावविभोर हो गया तो कुछ की नज़र में सामान्य सा दृश्य था मेरे दृष्टिकोण से नन्हे हाथों से चाँद-सितारे छोने की कोशिश जो सर्वदा सफल ही होती है.
अपूर्वा के साथ अनन्या, स्नेहा अयेशा, अपूर्व, अंशुल, सारांश, अभिषेक के दिमाग में जो भी कुछ जारी है ... जारी रखना होगा .. देश को इन्हीं नन्ही-मुन्नी कोशिशों से संबल मिलेगा . आइये इन सुनहरी नवकिरणों की सराहना करें उनके कहे को समझ कर . पालीथीन के प्रयोग को रोक कर बिना हैलमेट घर से न निकलने की शपथ लेकर हम इन बच्चों को प्रोत्साहित करें कल इन्हीं का है ये बच्चे सुनहरे कल के भारत का आभाषी बिम्ब हैं .