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लौह पुरुष की पुण्य तिथि मनाई गयी

 

sardarpatel

 

 

राष्ट्रीय एकता के बेजोड़ शिल्पी भारतीयों के दिलों में बसे हुए हैं : डॉ. प्रदीप देवघर (______________________________): स्थानीय विवेकानंद शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान तथा योगमाया मानवोत्थान ट्रस्ट के युग्म बैनर तले ताज ऑडिटोरियम में सरदार बल्लभभाई पटेल की 65 वीं पुण्य तिथि मनाई गयी । मौके पर विवेकानंद संस्थान के केन्द्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव ने कहा - आज ही के दिन सन् 1950 में सरदार बल्लभभाई पटेल की मृत्यु हुई थी । राष्ट्रीय एकता के बेजोड़ शिल्पी भले ही आज जीवित नही हैं, परन्तु , भारतीयों के दिल में बसे हुए हैं । वे भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं स्वतंत्र भारत के प्रथम गृहमंत्री थे । वे बर्फ से ढके एक ज्वालामुखी थे । वे वास्तव में भारतीयों जनमानस अर्थात् किसान की आत्मा थे । भारत की स्वतंत्रता संग्राम में उनका महत्व्पूर्ण योगदान है । उन्हें भारत का 'लौह पुरुष' कहा जाता है । गृहमंत्री के रूप में उनकी पहली प्राथमिकता देशी रियासतों को भारत में मिलाना था । इसको उन्होंने बिना कोई खून बहाए सम्पादित कर दिखाया । भारत के एकीकरण में उनके योगदान के लिए वे सदा अमर रहेंगे । संस्थान के किशोर सदस्य आदर्श कुमार ने कहा- उनकी शिक्षा मुख्यतः स्वाध्याय से ही हुई । बाद में लन्दन जाकर उन्होंने बैरिस्टर की पढ़ाई की और वापस आकर अहमदाबाद में वकालत करने लगे । महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया । विवेकानंद संस्थान के कोषाध्यक्ष प्रभाकर कापरी ने कहा- 1937 तक उन्हें दो बार कांग्रेस अध्यक्ष पद पर सुशोभित किया गया । कांग्रेस समितियॉं पटेल के पक्ष में थी । गांधी जी की इच्छा का आदर करते हुए पटेल जी ने प्रधानमंत्री पद की दौड़ से अपने को दूर रखा और इसके लिए नेहरू का समर्थन किया । उन्हें उपप्रधान एवं गृहमंत्री का कार्य सौपा । कार्यक्रम के दौरान अन्य वक्ताओं ने भी बल्लभभाई के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला । नवजीवन द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ ।

 

 

PRADIP KUMAR SINGH Deo

 

 

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