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श्री शशांक मिश्र भारती  विद्यासागर (डी.लिट.) की उपाधि से अलंकृत

 

साहित्यसमाचार:-

 


गत दिनों विक्रममशिला हिन्दी विद्यापीठ के 17 वें अधिवेशन में मौनतीर्थ गंगाघाट उज्जैन पर मुख्य अतिथिश्री एस.एस. सिसौदिया रामचाकर, विशिष्ट अतिथि डा.हरीशप्रधान कुलाधिपति डा. सुमनभाई जी, कुलपति डा.तेजनारायण कुशवाहा व कुलसचिव डा. देवेन्द्रनाथ साह की उपस्थिति में शाहजहांपुर उ.0प्र. निवासी व रा.इ. का. दुबौला पिथौरागढ़ उत्तराखण्ड में शिक्षक पद पर कार्यरत श्री शशांक मिश्र भारती को उनकी कृति पर्यावरण की कविताएं के लिए विद्यासागर (डी.लिट.) की उपाधि से अलंकृत किया गया।इनके अलावा 65 हिन्दी सेवियों को विद्यासागर, 88 को विद्यावाचस्पति, 15 को भारतगौरव, 5 को अंग गौरव, 3 को महाकवि, 1 को पत्रकार शिरोमणि, 1को ज्योतिष शिरोमणि, 16 को भारतीय भाषा रत्न, 9 को साहित्य शिरोमणि और 14 को समाजसेवी रत्न से अलंकृत किया गया।
गत दो दशकों से लेखन में लगे इनकी अब तक हमबच्चे ,पर्यावरण की कविताएं ,बिनाविचारे का फल, क्यों बोलते हैं बच्चे झूठ, मुखिया का चुनाव, आओ मिलकर गाएं पुस्तकें छप चुकी हैं। देश-विदेश की दो सौ के लगभग पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन के अलावा रचनाकार, सवर्गविभा, साहित्य शिल्पी, सृजनगाथा, कविताकोश, हिन्दी हाइकु और काशइण्डिया अन्तरजालों पर इनकी चार सौ से अधिक गद्य-पद्य रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं। दर्जनों राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय स्तरीय संगोष्ठियों ,परिचर्चाओं-जयपुर, दिल्ली, देहरादून, मसूरी ,झांसी ,इलाहाबाद, ग्वालियर, पटियाला, अल्मोड़ा, परियावां, भागलपुर आदि में भागीदारी के अलावा सात दर्जन से अधिक संस्था-संगठनों से सम्मानित प्रशंसित हो चुके हैं तथा प्रेरणा-एक2000, प्रतापशोभा बालसाहित्याकं 1997 रामेश्वर रश्मि पत्रिका 2003.2005,2008, अमृतकलश-2007 के संपादन के बाद वर्ष 2008 से विषय केन्द्रित संकलन देवसुधा का नियमित रूप से संपादन-प्रकाशन कर रहे हैं। जिसका वर्तमान अंक पर्यावरण की कविताओं पर केन्द्रित हैं और प्रेस में है।
सम्मानित होने पर अनेक साहित्यकारों शिक्षकों गाणमान्य नागरिकों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बधाई दी है।
दिनांकः-
25.02.2013
समाचार प्रेषकः-
कु. एकांशी शिखा, सम्पादन सहयोग
देवसुधा दुबौला-पिथौरागढ़

 

 

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