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श्री नन्दलाल भारती को विद्यावाचस्पति उपाधि

 

इंदौर / साहित्यकार श्री नन्दलाल भारती उपन्यास,कहानी,काव्य,लघुकथा एवं आलेख संग्रह सहित बीस पुस्तकें लिख कर साहित्य जगत् में अपनी उपस्थिति दर्ज करवा चुके हैं। वर्तमान में इनकी इक्कसवीं पुस्तक डंवरूआ ।उपन्यास। का लेखन कार्य प्रगति पर है। भारती ब्लाग लेखक के रूप में भी जाने जाते हैं। इनका अधिकतर हिन्दी साहित्य इनके ब्लागस,पर उपलब्ध है। श्री भारती से फेसबुक एकाउण्ट- पर सम्पर्क एवं इनकी रचनाओं को पढ़ा जा सकता है। इनके संवृद्ध हिन्दी लेखन कार्य पर भाशा एवं शैक्षणिक कार्य हेतु लंग्वेज टेकनालोजी रिसर्च सेन्टर, इण्टरनेशनल इन्स्टीटयूट आफ इंफोरमेशन एण्ड टेकनालोजी. हैदराबाद द्वारा शोध कार्य भी प्रारम्भ हो चुका है। श्री भारती के साहित्यिक योगदान एंव साहित्यिक कृति चाँदी की हंसुली ;उपन्यासद्धपर विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ, ;भारतीय अधिनियम के अन्र्तगत् निबंधित संख्या 244/82-83 भागलपुर द्वारा श्रीराम नाम सेवा आश्रम,उज्जैन के सभागार में आयोजित 17वें अधिवेशन में विद्यावाचस्पति ;क्वबजवत उपाधि प्रदान किया गया। इस अवसर पर माननीय कुलपति डां.तेजनारायणजी कुषवाह,कुलसचिव माननीय, डां.देवेन्द्र नाथ साह,यूनिवर्सिटी ग्राण्ट कमीशन के सदस्य, डां.मोहन तिवारी आनन्द,डां.आर.के.सिंह, सहित देश के कई साहित्यकार,बुद्विजीवी,एवं पत्रकार उपस्थित थे। पूर्व में भी श्री भारती को साहित्य की सेवा के लिये कई सम्मान प्राप्त हो चुके है। विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ की विद्यावाचस्पति उपाधि की प्राप्ति करने के बाद श्री भारती को डांक्टर लिखने की विधिवत् पात्रता प्राप्त हो गयी है।

 

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