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श्रद्धांजलि

 

 

suresh

"श्वेताभ" सदा अमर रहेंगे साहित्यप्रेमियों के दिल में - डॉ. प्रदीप देवघर (________________________): स्थानीय ताज ऑडिटोरियम में योगमाया मानवोत्थान ट्रस्ट तथा विवेकानन्द शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवम् क्रीड़ा संस्थान के युग्म बैनर तले योगमाया ट्रस्ट के संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष सह विवेकानन्द संस्थान के वरीय पदाधिकारी सुरेश प्रसाद सिंह "श्वेताभ" को उनकी आकस्मिक मृत्यु के कारण श्रद्धांजलि अर्पित की गई । मौके पर योगमाया ट्रस्ट के राष्ट्रीय सचिव सह विवेकानन्द संस्थान के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव ने कहा- उनका जन्म 2 अप्रैल,1941 में हुआ था ।प्रारंभिक शिक्षा मुंगेर जिले में हुई । तत्पश्चात् उन्होंने विधि में स्नातक तथा एम. ए.(द्वय) परीक्षा में उत्तीर्णता प्राप्त की । 17 मई, सन् 1959 में समस्तीपुर जिला निवासी वीणा सिंह से उनका विवाह सम्पन्न हुआ । अपने कर्म जीवन में अधिकतर समय बी.सी. सी. एल.(सी. आई. एल.) में व्यतीत किये और वहीँ से महाप्रबंधक के पद से सेवानिवृत हुए । वहीँ उन्होंने साहित्य के प्रति अपनी अभिरुचि दिखाई । वहाँ कई दिग्गज कवियों के सम्पर्क में आये और काव्यपाठ भी किये । सन् 2000-2001 में देवघर में आकर बाबा के शरणार्थी बन गए और तब से साहित्य और समाजसेवा में खुद को समर्पित कर दिए । अपने 50 वें विवाह के सालगिरह के अवसर पर 17 मई,2009 में हिन्दी विद्यापीठ के भव्य सभागार में स्वलिखित काव्य संग्रह "मौसम हुआ प्रतिकूल" का लोकार्पण किये और इस पुस्तक को अपनी सहधर्मिणी वीणा देवी को समर्पित की । सन् 2006 में उन्होने रामसेवक सिंह "गुंजन", डॉ. नागेश्वर शर्मा और अन्य कवि बंधुओं के साथ विवेकानन्द संस्थान द्वारा आयोजित "एक शाम कवियों के नाम" कार्यक्रम की शुरुआत की और सन् 2014 में 100 वीं संगोष्ठी का सफल आयोजन में अपनी भागीदारी निभाई । सन् 2006 में ही विवेकानन्द संस्थान और उर्मिला आइडियल पब्लिक स्कूल के युग्म बैनर तले "तमसो मा ज्योतिर्गमय शैक्षणिक संगोष्ठी" की भी शुरआत में अहम् भूमिका निभाई ।इन दोनों संस्थानों के अलावे वे श्री रामकथा समिति, वयस्क नागरिक संघ, पेंशनर समाज, मैथिली मंच और कई अन्य संस्थानों से जुड़े रहे । उन्हें "इलाहाबाद लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड-2009-10", "माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय शिखर सम्मान", "मिर्जा ग़ालिब राष्ट्रीय शिखर सम्मान", "विद्या वाचस्पति सम्मान", "लाला लाजपत राय स्मृति राष्ट्रीय शिखर सम्मान", "एकलव्य सारस्वत सम्मान", "देवघर काव्यश्री सम्मान", "गीतांजलि शतवार्षिकी स्मृति समर्पण सम्मान", "रवीन्द्र विवेक राधाकृष्णन सम्मान" एवं अन्य कई सम्मानों से नवाजा जा चुका है । सन् 2011 में गुजरात के राज्यपाल डॉ. कमला बेनीवाल को श्री श्री रामकृष्णपरामहंसदेव व रवीन्द्र नाथ टैगोर की तस्वीर समर्पित की एवं इसी वर्ष सरदार बल्लभ नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, सूरत, गुजरात की स्वर्ण जयंती के अवसर पर आयोजित काव्य संध्या में एक कवि के रूप में अपनी भागीदारी निभाई । श्वेताभ जी भले ही अब मंचो पर नहीँ दिखेंगे परन्तु युग-युगान्तर तक साहित्यप्रेमियों के दिल में अमर रहेंगे । वे अपने पीछे धर्मपत्नी वीणा देवी, चार पुत्ररत्न-रविन्द्र कुमार सिंह(एम्.बी.ए.),कर्नल मनोज कुमार सिंह, दिवेश कुमार सिंह (ओ.एन. जी. सी.) एवं अभिषेक सूर्य (संगीत शिक्षक, गीता देवी डी.ए. वी.पब्लिक स्कूल), चार पुत्रवधु अवं सात नाती-नतिनी छोड़ कर गए । ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष प्रभाकर कापरी ने कहा- सुरेश बाबू एक साहित्यकार ही नहीँ वल्कि एक अच्छे इंसान भी थे । उनका आतिथ्य-सत्कार कभी भुला नही जा सकता है । सन् 2014 में जसीडीह पब्लिक स्कूल परिसर में आयोजित राष्ट्रीय कवि सम्मलेन में अपनी कविता से काव्यप्रेमियों के दिल में एक अलग पहचान बना ली । ट्रस्ट के किशोर सदस्य आदर्श सिंह ने कहा- साहित्य जगत में उनकी कमी सदा खलेगी । उनकी आकस्मिक मृत्यु से डॉ. तारा सिंह, डॉ. ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह, शत्रुघ्न प्रसाद, दीपक कुमार (सभी मुम्बई), डॉ. सुभाष राय ( शांति निकेतन, विश्व भारती ),डॉ. जनक सिंह मीणा(राजस्थान), डॉ. कँवर दिनेश सिंह (हिमाचल प्रदेश), हरि नारायण गुप्ता, नृपेंद्र प्रसाद गुप्त, डॉ. देवेन्द्र नाथ साह, डॉ. इंदु भूषण मिश्र"देवेंदु" (सभी बिहार), प्रो. तारा चरण खवाड़े, डॉ. शंकर मोहन झा, गिरीश प्रसाद गुप्ता, उमा शंकर राव"उरेंदु", प्रो. रामनंदन सिंह, प्रसून बसु, काजल कांति सिकदार, श्रीधर दुबे, वीरेश वर्मा, प्रकाश चंद्र झा, जालेश्वर ठाकुर शौकीन, डॉ. नागेश्वर शर्मा, पूर्व आई. जी. कपिलदेव प्रसाद सिंह, श्रीकांत झा, के. के.मालवीय, ई. इंद्रानन सिंह, ई. अंजनी कुमार मिश्र, ई.ओम प्रकाश मिश्र, फाल्गुनी मरीक कुशवाहा, रामसेवक सिंह गुंजन, प्रेम कुमार, सुरेन्द्र कुमार, सोमेश दत्त मिश्र, सुनीता सिंह, डॉ. भारतेंदु दुबे (सभी देवघर) व अन्य ने पूर्व में ही श्रद्धांजलि अर्पित कर चुके हैं ।

 

 

 

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