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Vatayan: Poetry on South Bank Award Ceremony-2016

 

 

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लंदन, 19 मई, वातायन पोएट्री ऑन साउथ-बैंक पुरस्कार-समारोह 2016 का आयोजन, विंडसर और मिडलैंड की बैरोनेस फ्लैदर, वातायन के संरक्षक एवं गुजरात समाचार और एशियाई आवाज समाचार पत्र के संपादक श्री सीबी पटेल और गीतकार-गायिका और संगीतकार तान्या वेल्स की उपस्थिति में हाउस ऑफ लॉर्ड्स में एक खचाखच भरे सभागार में किया गया। समारोह की अध्यक्षता इल्मी मजलिस- लन्दन के अध्यक्ष एवं इतिहासकार ज़िया शकेब ने की।

प्रतिष्ठित वक्ताओं में शामिल थे - लेखक और वातायन की संस्थापक, अध्यक्ष दिव्या माथुर, ब्रिटेन में गुजराती शिक्षण के अग्रणी संस्थापक, लेखक एवं शोधकर्ता प्रोफ़ेसर जगदीश दवे एमबीई, लेखक और बीबीसी विश्व हिंदी सेवा की पूर्व प्रमुख डॉ अचला शर्मा, U3-आंदोलन की सदस्य एवं परिवार और मानसिक स्वास्थ्य सलाहकार मीरा चंद्रन, लेखक और काव्य रंग-नॉटिंघम की अध्यक्ष जय वर्मा, लेखक और वतायान कोषाध्यक्ष शिखा वार्ष्णेय।
नेत्र सर्जन, फिल्म निर्माता, कवि और रेडियो-प्रस्तोता डॉ निखिल कौशिक द्वारा कार्यक्रम का सुन्दर ढंग से संचालन किया गया।

वार्षिक-वातायन काव्य पुरस्कार से प्रसिद्ध और अनुभवी कवयित्री डॉ मधु चतुर्वेदी को सम्मानित किया गया जिन्होंने गीत, ग़ज़ल, खंड-काव्य, कविता और हाइकु की एक दर्जन से अधिक पुस्तकें लिखी हैं। मधु जी की अनुपस्थिति में, उनकी बेटी, अंजलि बेदी ने यह पुरस्कार स्वीकार किया बैरोनेस फ्लैदर और डॉ ज़िया शकेब के करकमलों द्वारा।

अन्तराष्ट्रीय कविता साधना सम्मान, श्री सी बी पटेल, बैरोनेस फ्लैदर और डॉ जिया शकेब द्वारा योगेश पटेल को, अंग्रेजी, गुजराती और हिंदी साहित्य में उनके असाधारण योगदान के माध्यम से कविता को बढ़ावा देने एवं विश्व साहित्य को समृद्ध बनाने हेतु दिया गया।
अंग्रेजी और गुजराती साहित्य के जाने माने कवि एवं लेखक योगेश को आलोचकों ने “एक व्यवहारिक और अप्रत्याशित निरीक्षक और निर्भीक लेखक” के तौर पर चुना है. उन्होंने कई विश्व प्रसिद्ध नामों के साथ 1969 से अंतरराष्ट्रीय कविता की दुर्लभ आवाजों का प्रकाशन किया है. सबसे बड़ी बात यह है कि वे दक्षिण- एशियाई प्रवासियों की रचनाओं को बढ़ावा देते हैं एवं प्रकाशित करते हैं।
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अंत में, प्रतिष्ठित भारतीय कवि डॉ कुंवर बेचैन को वातायन लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। वे कुल मिलाकर 33 पुस्तकों (गीत, गजल, दोहा, हाइकू, मुक्त छंद, महाकाव्य, उपन्यास, यात्रा वृतांत, आदि) के लेखक है। एक सेवानिवृत्त हिंदी प्रोफेसर कुंवर बैचेन को भारत के राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया है। 22 छात्रों ने उनपर अपना शोध कार्य लिखा है और भारत सरकार कई देशों में विश्व हिंदी सम्मेलनों में भाग लेने के लिए भी उन्हें भेज चुकी है।

मशहूर संगीतज्ञ बालूजी श्रीवास्तव, ने सरस्वती वन्दना की तो वकील और उभरती हुई प्रतिभाशाली कलाकार मेहताब मल्होत्रा ने मधु चतुर्वेदी की एक ग़ज़ल, , को गा कर सुनाया और तान्या वेल्स ने फैज़ अहमद फैज़ की ग़ज़ल “गुलों में रंग भरे” पेश करके दर्शकों का दिल जीत लिया।

सबसे कम उम्र और बोर्ड की नई सदस्य दीप्ति संगानी ने वातायन की नवनिर्मित वेबसाइट का शुभारंभ किया। हालाँकि दीप्ति वेबसाईट की विशेषज्ञ नहीं हैं फिर भी उन्होंने इस पर बड़े धैर्य और सहजता से कार्य किया है। समय की कमी की वजह से, कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ शकेब ने संक्षेप में और सुन्दरता के साथ कार्यक्रम का सारांश प्रस्तुत किया।

मेजबान बैरोनेस फ्लैदर ने, प्रतिभागियों का धन्यवाद और 2003 से लगातार वातायन द्वारा आयोजित अच्छे कार्यक्रमों की प्रशंसा करते हुए कार्यक्रम का समापन किया। इस कार्यक्रम में ब्रिटेन के बहुत से मशहूर विद्वान्, राजनीतिग्य, मीडियाकर्मी और आर्टिस्ट्स शामिल थे, जिनमें प्रमुख रहे, बैरोनेस पराशर, डॉ हिलाल फ़रीद, प्रो श्याम मनोहर पांडये, प्रो दया थुस्सू, जेरू राय, अरुणा अजित्सरिया, राकेश माथुर, उषा राजे सक्सेना, कादम्बरी सक्सेना, और तोषी अमृता इत्यादि।

 

 

दिव्या माथुर

 

 

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