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स्वामी विवेकानंद जयंती

 

 

vivekanand

 

स्वामीजी की वैचारिक परिधि का केंद्रविन्दु सहिष्णुता थी : डॉ. प्रदीप देवघर(____________________): स्थानीय विवेकानन्द शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान तथा योगमाया मानवोत्थान ट्रस्ट के युग्म बैनर तले ताज ऑडिटोरियम में श्री श्री रामकृष्ण परमहंस देव के परम शिष्य तथा आर. के. मिशन विद्यापीठ के संस्थापक स्वामी विवेकानन्द की 153 वीं जयंती धूमधाम से मनाई गयी । मौके पर विवेकानन्द संस्थान के केन्द्रीय अध्यक्ष, स्वामी विवेकानन्द राष्ट्रीय शिखर सम्मान पुरस्कार विजेता डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव ने कहा- विदेशों में भारतीय ज्ञान और दर्शन की ज्योति जलाने वाले आधुनिक मनीषियों में स्वामी विवेकानन्द अग्रणी हैं । उनके मत की मूलभूत विशेषता एक समन्वयात्मक दृष्टिकोण है । वस्तुतः भारत में रूढ़िगत, पक्षपातपूर्ण और संकीर्ण विचारधाराओं में स्वामीजी के उदारवादी दृष्टिकोण से अचानक परिवर्तन आया । उनका प्रयास तत्कालीन जीवन में जमे अवसाद को कतरा कतरा काटना था । उन्होंने नैतिक जीवन के उत्थान को अपने विचारों में प्राथमिकता दी । यही कारण था कि वे पश्चिम में अत्यन्त चर्चित हुए एवं उच्च स्तर पर सराहे गए । जहाँ तक आधुनिक युग में किसी भारतीय संत द्वारा विदेशों में जाकर भारतीय विचारधाराओं को प्रथमतः संप्रेषित करने का सम्बन्ध है, स्वामी जी ऐसे प्रथम व्यक्ति थे । वे द्वैतवाद ऊके विरोधी और अद्वैतवाद के पक्षधर थे । एक वेदांती की तरह वे सृष्टिचक्र, एकेश्वरवाद और ज्ञान प्राप्ति में विश्वास करते थे । अमेरिका में अपने एक भाषण में स्वामीजी ने कहा था कि वेदांत वह विशाल सागर है जिसके वक्ष पर युद्धपोत और साधारण बेड़ा पास-पास रह सकते हैं । वेदांत में योगी, मूर्तिपूजक और नास्तिक इन सभी के लिए पास-पास रहने का स्थान है । इतना ही नहीँ वेदांत सागर में हिंदु, मुसलमान, ईसाई या पारसी सभी एक है--सभी उस सर्वशक्तिमान परमात्मा की संतान हैं । स्वामीजी की वैचारिक परिधि का केंद्रविन्दु सहिष्णुता थी, जिसकी विश्वजनीन व्यवहार्यता धार्मिक एवं सांप्रदायिक समन्वय से ही संभव है । योगमाया ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष प्रभाकर कापरी ने कहा- आज ही के दिन सन् 1863 में स्वामीजी का जन्म हुआ था । उन्होंने माध्यम मार्ग पर ज्यादा बल दिया । मॉडर्न मोन्टेस्सोरी अकादमी के शिक्षक अजय नन्दन ने कहा- स्वामीजी की राह पर चलकर हम उनका सपना पूरा करेंगे । संस्थान के किशोर सदस्य आदर्श कुमार सिंह ने भी विषय वस्तु पर अपना विचार रखा ।

 

 

 

PRADIP KUMAR SINGH Deo

 

 

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