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सुखमंगल सिंह

 

 

नाम- सुखमंगल सिंह s/oस्वर्गी ० रामसमुझ सिंह
माता- ..श्रीमती मेवाती देवी
पत्नी -श्रीमती उर्मिला सिंह
फोन /वाट्सप -९४५२३०९६११
जन्म स्थान -ग्राम /पोष्ट -अहिरौली रानीमऊ
जनपद -तत्कालीन फैजाबाद ,
वर्तमान में जनपद -अम्बेडकरनगर
व्यवसाय -सेवानिब्रित टेलीकाम टेक्नीशियन बी.एस. एन. एल.
सम्मान -साहित्यकार गोपालदास नीरज द्वारा और विविध संस्थाओं
दूरदर्शन वाराणसी से काव्य प्रसारण सन २०१६

ईमेल
sukhmangal@gmail.com
वर्तमान स्थाई पता -
पता
सा २/३९८ ई-१० फेस -2 प्रेमचन्द नगर कालोनी पाण्डेय पुर वाराणसी पिन कोड -
२२१००२

सुखमंगल सिंह की प्रकाशित कविताएं


1- आराधना, 2-काशी का चातुर्मास, 3-कल्प, 4- पुकार, 5- वक्त, 6- राखो चुंदरिया संवारि, 7- आर्थिक विषमता, 8- पान मसाला, 9-बाबा हमहूँ काशी आयो?, 10- अनोखी काशी! 11-भाषा, 12- हृदय सुधा, 13- कर्म का वंधन, 14- मुक्तद्वय, 15- हुँकार भरो हिंदी, 16- नारी जागो, 17 नारी कब जागोगी, 18- सत्यो की सत्य संजीवनी काशी, 19- स्वर्ग भूमि--काशी, 20- किरनावली मचलने लगी, 21- सठियाय गया भारत? 22-श्रीकृष्ण, 23-वोटर, 24- पं0 सुधाकर, 25-जीने दो, 26- चलते चलो चलते चलो, 27- बव्रज वीथिन होरी, 28- बदरंग, 29- झोरी-होरी, 30- सद्भावना, 31- हमरी दइयाँ निष्ठुर भइला हो बनवारी, 32- अंधकार, 33- झूला, 34- रात, 35- दिलवर, 36- नदियों में गंगा, 37- पिचकारि, 38-शहर में अंधेरा, 39- बरसात करा के न जाइए, 40- माँ, 41- कुंडली मारि बैठे, 42- खास बताया नहीं जाता, 43- कवि, 44- बहिनों की पुकार, 45- ड्योढी दईतरा बाबा के, 46- भ्रष्टाचार एटमवम हो गइल? 47- अट्हास करता इतिहास, 48- मौसमी मन, 49-हुँकार कर, 50- स्वप्नदल, 51- होली की बाजार, 52- होली चहकी, 53-वालायोगी, 54- हरिबाना, 55- भूचाल, 56- कल्पनाएं, 57-अरुस फुलायल होली में, 58- इंसान बनकर देख, 59- मंगल वानी, 60- तंद्रा, 61- भारत महान, 62- जरासन्न, 63- अमृत छोड़ मैखाने जाते, 64- भूलो बीती बात, 65- जेठ, 66- पुष्टि करता, 67- कृष्ण लाल आइके, 68- गाओ गान, 69- शंख बजे, 70- रंग जमादे, 71- नया भोर, 72- ख्याल करो, 73-श्रीपति आवत, 74- मानवता, 75- प्रणाम, 76- आने वाला समय, 77- पावस पर्व, 78- धनि-धनि जसोमति, 79- कुछ उपाय करो, 80- खादी बनाम इतिहास, 81- मुल्क, 82- मंत्र, 83-ક્ષत्रिय, 84- बालाएं गायेंगी, 85- आँसू पोछ तू अपनी हिंदी, 86- गंगा महिमा,आदि

 

 

 

 

सुखमंगल सिंह के प्रकाशित पत्रिकाओं में लेख
1-साहित्तिक गौरवमयी काशी, काशी संचार संदेशसन्2011 2-काशी है विद्वानों की खान;यही है पहचान, वाराणसी वुलेटन17से23 अगस्तसन्2010 3-गुरु शिष्य की परम्परा की शुरुवात कब और कैसे? वही13से19जुलाई2010 4-पुरातन काल से विद्या का केन्द्र-काशी, काशी संचार संदेशसन् 2010 5-काशी में हिंदू राज्य कैसे, समाचार एक्सप्रेस दिसम्वर7,सन्2007व नागरी पत्रिका वाराणसी 6-वाराणसी दर्शनीय स्थल, काशी संचार संदेश सप्तम अंक 7-मुक्तिदायनी पापनाशिनी काशी, काशी संचार संदेशसन् 2003 8-काशी जैसा अविमुक्त ક્ષેत्र नहीं, काशी संचार संदेशसन्2004 9-काशी का समन्वात्मक स्वरूप, काशी संचार संदेश सन्2005 10-धर्म की आस्था पर हम सभी एक हैं, शिवांजलि,हिंदी विकी 11-भरत चरित्र चिंतन, नागरी पत्रिका सन्2005 12-मातृ महिमा चिंतन, नागरी पत्रिका सन्2006 13-काशी कहाँ चली तू, नागरी पत्रिका सन् 2005 14-अलौकिक જ્ઞાन राशि और भक्ति भावना की नगरी है काशी, काशी संचार संदेशसन् 2002 15-होली आई हो , नागरी पत्रिकासन् 2006,--- 16-विलક્ષण प्रतिभा सुदृढ़ आत्मवल और जन-जन प्रेमी थेपं0 सुधाकर पाण्डेय, नागरी पत्रिका सन् 2006 17- महा कवियों की होली, नागरी पत्रिका सन्2007 18- हिंदी पुरुष पं0 सुधाकर पाण्डेय, सन् 2007नागरी पत्रिका 19- स्वर्ग भूमिજ્ઞાनोद्गम काशी, पं0 कमला पति जी की स्मारिकासन्2008 वाराणसी 20-प्रो0 शुकदेव सिंह माटी से जुड़े साहित्यकार मनीषी पुरुष थे, (शबद शिल्पी)वि0वि0 प्रकाशन 21-नारी कब जागोगी, समाचार एक्सप्रेस सन् 2008 व हिंदी विकी 22- काशी की पुत्री वीरांगना लક્ષ્मीवाई, हिंदी विकी,काशी संचार संदेश 23-सत्यों की सत्य संजीवनी काशी, काशी संचार संदेश सन् 2008 24- जागो नारी, समाचार एक्सप्रेससन् 2008 व हिंदी विकी

 

पसंदीदा उद्धरण

वाराणसी में दूरदर्शन स्टूडियो की माँग(सन्1995)में
समाज को सत्कर्म के मार्ग पर ले जाने के लिए विविध आवश्यकताओं की आवश्यकता होती है । यदि आवश्यकता

की पूर्ति हो जाती है तो
मानव दूसरी बहुमूल्य वस्तु की तलाश में आगे बढ़कर कार्य करने लगता है, यानी आकांક્ષા प्रबल होने लगती है । दूरदर्शन केन्द्र पास के जिले गोरखपुर में होने के बाद भी वाराणसी जैसे साहित्यिक नगरी में न होना संस्कृति को आइना दिखाना लग रहा था । यही कारण था कि हमनें साहित्यकारों,कवियों ,कलाकारों , आदि को सम्मान मिले एक छोटा प्रयोग किया जिसे समाचारों के माध्यम से अखबारों नें महत्वपूर्ण एवं पुनीत कार्य समझकर अपने-अपने प्रमुख समाचार पत्रों में जगह दिया प्रस्तुत है- निष्पક્ષ समाचार ज्योति:- वाराणसी,10 दिसम्बर। अखिल भारतीय सद्भावना संगठन(एसोसिएशन) की एक बैठक प्रसिद्ध रबला वादक श्री प्रकाश महाराज के निवास स्थान कबीर चौरा पर हुई ।

जिसमें सुखमंगल सिंह राष्ट्रीय अध्यક્ષ एवं विश्व प्रसिद्ध तबला वादक श्री प्रकाश महाराज नें शासन एवं भारत
सरकार से वाराणसी में दूरदर्शन स्टूडियो केन्द्र खोलने की संयुक्त रूप से मांग की है जिससे साहित्यकारों,कवियों, रंगकर्मियों, संगीतकारों, एवं बुद्धिजीवियों की भावनाओं का आदर हो सके। ऐसा न करने पर भूख हड़ताल,अनशन एवं आमरण अनशन करनें की चेतावनी दी है । समाचार11दिसम्बर1994 । राष्ट्रीय सहारा दैनिक:--

वाराणसी,11दिसम्बर। अखिल भारतीय सद्भावना संगठन की कल हुई बैठक में वक्ताओं ने केन्द्र सरकार से
वाराणसी में दूरदर्शन स्टूडियो खोले जाने की मांग की है ।बैठक में संगठन के अध्यક્ષ सुखमंगल सिंह तथा तबला- वादक प्रकाश महाराज ने कहा कि केन्द्र सरकार ने इस सम्बन्ध में तत्काल निर्णय नहीं लिया तो आमरण अनशन किया जाएगा । यह समाचार सोमवार 12 दिसम्बर1994 को लखनऊ से प्रकासित हुआ ।

 

काशीवार्ता :--

 

वाराणसी । अखिल भारतीय सद्भावना संगठन (एसोसिएशन) की बैठक प्रसिद्ध रबला वादक श्री प्रकाश महा-
राज के निवास स्थान कबीर चौरा पर हुई । जिसमें सुखमंगल सिंह राष्ट्रीय अध्यક્ષ एवं विश्व प्रसिद्ध तबला वादक श्री प्रकाश महाराज नें शासन एवं भारत सरकार से वाराणसी में दूरदर्शन स्टूडियो केन्द्र खोलने की संयुक्त रूप से मांग की ।यह समाचार 11 दिसम्बर 1994 वे में पृ0 4 पर जगह मिली ।

 

दैनिक जागरण(इलाहाबाद) 12 दिसम्बर1994(11) में प्रकाशित उपरोक्त स्थान पर बैठक में वही माँग
प्रकाशित हुई जिसके सपोर्ट में 09/03/1995 को राष्ट्रीय सहारा पृष्ठ3 पर कि "काशी में दूरदर्शन स्टूडियो का शिलान्यास इसी माह " नें साहित्यकारों कलाकारों आदि में खुसी की लहर ला दी ।