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वो मिठास फिर कहीं न पायी

 

 

womithas

 

 

 

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वो मिठास फिर कहीं न पायी
जो थी अम्मा के हाथों की
याद मुझे अब भी आती है
रोटी अम्मा के हाथों की
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- बृजेश यादव

 

 

 

 

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