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Dakshesh Surajiya

 

 

1
अब उनकी हमसे मुलाकात नहीं होती
हर पल जिनके साथ बैठा करते थे
जिनसे अजब गजब रिस्ते बनाए थे
वो सहरो में अब दिखाए नहीं देते।
2
पत्थर दिल पर उससे कैसे छोड़ देते,
मेहबूब तो मेरा ही था
अपनी ज़िन्दगी किसके हवाले छोड़ देते।।
3
मै रहूँगा तो कब तक
एक दिन तो ओझल होना ही है
क्यों न आज हे चल दू राह पर
एक दिन तो सबको सोना ही है।।

 

 

 

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