अनुराग शुक्ला sher

                                       



www.swargvibha.in






अनुराग शुक्ला

 

 

"आजाद नहीं फौलाद था वह, पत्थर सा जिसका सीना था।
था वतन हेतु मरना जिसको, और वतन हेतु ही जीना था।
अपनी ही गोली से सीना अपना ही छलनी कर डाला....
भारत माता के हेतु बहा , सब जिसका लहू - पसीना था। "
(शत शत नमन उस युगपुरुष क्रन्तिकारी को!)

 

बाढ़ क्या गाँवों में आई, बन गईं नहरें नदी।
छंद बन्धन के बिना ज्यों बन गए हैं सब कवी।
लोग अब हर बात को कविता समझने हैं लगे,
(हेंह…) और केवल अपने गम को समझते हैं शायरी…"

 

yugonki

 

tiranga

 

 

 

 

HTML Comment Box is loading comments...