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एक कुंडलिया

 

"श्रम से ही मिलता सदा, जीवन लक्ष्य महान;
ज्ञान और सम्मान है, श्रम का ही अवदान।
श्रम का ही अवदान,मिले पग-पग पर मोती,
श्रम की चाभी बंद भाग्य का द्वार खोलती।
पीड़ा कष्ट न समझें कभी परिश्रम, भ्रम से,
सब कुछ होता साध्य करो यदि उसको श्रम से।
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-गौरव शुक्ल मन्योरा

 

 

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