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अनुराग शुक्ला

 

 

 

"विजय - रथ को शिखर के शीर्ष तक चढने नही देती !
सफलता के सितारों से मुकुट मढने नहीं देती !
अगर चढते समय झुकना नही हम सीख पाते तो ,
हमारी आत्मश्लाघा ही हमें बढने नही देती ....."

 

"जीवन भर कवितायेँ गायीं, फिर भी शेष व्यथायें हैं।
लिखते-लिखते ऊब गया पर, चुकती नहीं कथायें हैं।
मेरे जीवन-मरुथल में ये अनुभव अद्भुत लगता है,
कण्ठ रुँधा बिन पानी के है, आँखों में सरितायें हैं..."

 

bapu

 

 

 

 

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